राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 8 अप्रैल 2026
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव और सैन्य टकराव के बाद घोषित सीजफायर पर देश के वरिष्ठ नेता Farooq Abdullah ने चिंता और सतर्कता से भरी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “हमें नहीं पता कि शांति को वापस लौटने में कितना समय लगेगा,” जो इस पूरे घटनाक्रम की अनिश्चितता को दर्शाता है। अब्दुल्ला का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में हालात पिछले कई हफ्तों से बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की निगाहें इस संघर्ष पर टिकी हुई थीं।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि सीजफायर का ऐलान निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे स्थायी शांति का संकेत मान लेना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान जो अविश्वास और तनाव पैदा होता है, उसे खत्म होने में समय लगता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई बार सीजफायर सिर्फ एक “विराम” होता है, जिसके बाद हालात फिर बिगड़ सकते हैं, इसलिए सभी पक्षों को संयम और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि वह केवल बयानबाजी तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस प्रयास करे ताकि क्षेत्र में स्थिरता कायम हो सके। अब्दुल्ला ने कहा कि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है, खासकर ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के मामलों में। ऐसे में वैश्विक शक्तियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे हालात को बिगड़ने से रोकें।
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस सीजफायर को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ देश इसे कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं, वहीं कई विशेषज्ञ इसे अस्थायी राहत बता रहे हैं। जमीन पर स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियां जारी रहने की खबरें भी सामने आ रही हैं।
फारूक अब्दुल्ला ने अंत में कहा कि असली परीक्षा अब शुरू होती है—क्या यह सीजफायर स्थायी शांति में बदल पाएगा या फिर यह केवल एक अस्थायी ठहराव साबित होगा। उनके मुताबिक, आने वाले दिन तय करेंगे कि यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता लाता है या फिर एक बार फिर तनाव बढ़ने का कारण बनता है।




