एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026
कांग्रेस ने अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए नए ट्रेड समझौते को भारत के लिए बेहद नुकसानदेह करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह डील भारतीय कपड़ा उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को कमजोर करती है और सीधे तौर पर भारत के निर्यात, कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला और रोज़गार पर असर डालती है। कांग्रेस के अनुसार, जिस समय वैश्विक बाजार में भारत को अपने पारंपरिक उद्योगों को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए आक्रामक कूटनीति की ज़रूरत थी, उस समय सरकार की निष्क्रियता देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रही है।
टैरिफ संरचना में असमानता: भारत पीछे, बांग्लादेश आगे
कांग्रेस ने बताया कि भारतीय कपड़ों पर अमेरिका में फिलहाल 18 प्रतिशत टैरिफ लागू है, जबकि बांग्लादेशी कपड़ों पर 19 प्रतिशत टैरिफ होने के बावजूद उसे Zero Access Clause का लाभ मिलता है। इस विशेष प्रावधान के चलते अमेरिकी कॉटन और man-made fibers से बने कपड़ों एवं परिधानों पर बांग्लादेश को शून्य टैरिफ का फायदा मिलेगा, जो भारत को उपलब्ध नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि यही असमानता भारतीय निर्यातकों को लागत और कीमत—दोनों मोर्चों पर कमजोर कर देगी।
कच्चे माल पर सीधा असर: भारतीय कॉटन को झटका
पार्टी के मुताबिक, बांग्लादेश लंबे समय से भारतीय कॉटन का बड़ा खरीदार रहा है। लेकिन अमेरिका के साथ नई डील के बाद बांग्लादेश को ज़ीरो टैरिफ का लाभ लेने के लिए कच्चा माल सीधे अमेरिका से खरीदना ज्यादा फायदेमंद पड़ेगा। इससे भारतीय किसानों, कॉटन ट्रेडर्स और सप्लाई चेन से जुड़े लाखों लोगों को नुकसान होगा। कांग्रेस ने चेताया कि यह बदलाव केवल व्यापार का नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डालेगा।
निर्यात प्रतिस्पर्धा में दोहरी मार
कांग्रेस ने कहा कि भारत पहले से ही वैश्विक बाजार में बांग्लादेश के साथ कपड़ा और परिधान निर्यात में कड़ा मुकाबला कर रहा है। अब इस डील के बाद बांग्लादेश को लागत में सीधी बढ़त मिल जाएगी, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए ऑर्डर हासिल करना और कठिन हो जाएगा। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने समय रहते अमेरिका के साथ टैरिफ और मार्केट-एक्सेस पर ठोस बातचीत नहीं की, जिसका खामियाजा अब उद्योग को भुगतना पड़ेगा।
टेक्सटाइल हब्स पर संकट: तिरुपुर, सूरत और पानीपत
कांग्रेस ने चेताया कि भारत के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्र—तिरुपुर, सूरत और पानीपत—पहले से ही अमेरिका के 18 प्रतिशत टैरिफ से दबाव में हैं। अब बांग्लादेश जैसे बड़े खरीदार और प्रतिस्पर्धी के हाथ मजबूत होने से इन औद्योगिक शहरों में उत्पादन, निर्यात और रोज़गार पर और संकट गहराने की आशंका है। कांग्रेस का कहना है कि छोटे और मझोले उद्यम इस झटके को सबसे पहले महसूस करेंगे।
रोज़गार पर खतरा और सरकार से जवाबदेही की मांग
कांग्रेस ने कहा कि भारत का कपड़ा उद्योग लाखों लोगों के लिए रोज़गार का प्रमुख स्रोत है—किसान से लेकर फैक्ट्री मज़दूर और छोटे कारोबारी तक। पार्टी का आरोप है कि मोदी सरकार की गलत व्यापार नीति और कमजोर कूटनीति ने इस उद्योग की “तबाही सुनिश्चित” कर दी है। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार तत्काल अमेरिका के साथ टैरिफ समानता, मार्केट-एक्सेस और भारतीय उद्योग के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि देश का कपड़ा उद्योग और उससे जुड़े लाखों रोज़गार बचाए जा सकें।




