Home » National » WATCH VIDEO — करोड़ों परिवारों को रोजगार देने वाला टेक्सटाइल सेक्टर तबाह हो जाएगा: राहुल गांधी

WATCH VIDEO — करोड़ों परिवारों को रोजगार देने वाला टेक्सटाइल सेक्टर तबाह हो जाएगा: राहुल गांधी

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 फरवरी 2026

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह समझौता देश के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकता है। संसद में अपने वक्तव्य के दौरान उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान का टेक्सटाइल सेक्टर लगभग 5 करोड़ परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार देता है और यह केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि करोड़ों आदमी और उनके परिवारों की रोजी-रोटी का आधार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने व्यापार समझौते की शर्तों को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप संतुलित नहीं किया, तो इसका व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कपास उत्पादक किसानों, बुनकरों और छोटे-मझोले उद्योगों पर पड़ेगा।

राहुल गांधी ने विशेष रूप से अमेरिका के बाजार में टैरिफ असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि बांग्लादेश को 0 प्रतिशत टैरिफ की छूट मिलती है और भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू रहता है, तो भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना बेहद कठिन हो जाएगा। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में वैश्विक खरीदार कम लागत और कम शुल्क वाले विकल्प की ओर झुकेंगे, जिससे भारतीय निर्यात ऑर्डर बांग्लादेश की ओर स्थानांतरित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह असमान व्यवस्था धीरे-धीरे भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को कमजोर कर देगी और अंततः लाखों श्रमिकों की नौकरियों पर संकट खड़ा हो जाएगा।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal के उस बयान पर भी राहुल गांधी ने सवाल उठाए, जिसमें अमेरिका से कॉटन आयात को संभावित रूप से लाभकारी बताया गया था। राहुल गांधी ने कहा कि भारत की अधिकांश टेक्सटाइल मिलें घरेलू कपास पर आधारित हैं और देश का कपास उत्पादन न केवल आंतरिक मांग को पूरा करता है, बल्कि बांग्लादेश जैसे देशों को निर्यात भी किया जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि बड़े पैमाने पर विदेशी कपास आयात की नीति अपनाई जाती है, तो इससे भारतीय कपास किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे कृषि क्षेत्र में असंतुलन पैदा हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

राहुल गांधी ने इस पूरे मसले को दोहरे संकट के रूप में पेश करते हुए कहा कि यदि सरकार बांग्लादेश जैसा मॉडल अपनाती है और आयातित कच्चे माल पर निर्भरता बढ़ाती है, तो देश के कपास किसान और घरेलू कॉटन उद्योग प्रभावित होंगे। दूसरी ओर, यदि टैरिफ असमानता को दूर किए बिना समझौता किया जाता है, तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएगा। उन्होंने इसे “ट्रेड डील की असली सच्चाई” बताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा कि वह किसानों और उद्योग—दोनों के हितों की रक्षा किस प्रकार सुनिश्चित करेगी।

सरकार की ओर से यह कहा गया है कि किसी भी संभावित ट्रेड डील में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होंगे और भारत अपने उद्योगों तथा किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा। वाणिज्य मंत्रालय का तर्क है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कच्चे माल की लागत, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और निर्यात वृद्धि के लिए रणनीतिक लचीलापन आवश्यक है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि सरकार को पहले ठोस सुरक्षा उपायों, सब्सिडी संरचना, और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का स्पष्ट खाका पेश करना चाहिए, ताकि छोटे बुनकरों, पावरलूम संचालकों और कपास उत्पादक किसानों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

टेक्सटाइल सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करता है और निर्यात आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। ऐसे में यह मुद्दा केवल राजनीतिक विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता और सामाजिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में संसद और सियासी मंचों पर इस ट्रेड डील को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार अंतिम समझौते की शर्तों को किस रूप में सार्वजनिक करती है और क्या वह उद्योग, किसानों और करोड़ों परिवारों के हितों के बीच संतुलन स्थापित कर पाती है या नहीं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments