एबीसी नेशनल न्यूज | बेंगलुरु | 25 फरवरी 2026
बेंगलुरु के सरजापुर स्थित Azim Premji University में मंगलवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई जब Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जबरन कैंपस में प्रवेश की कोशिश की। विवाद की वजह एक प्रस्तावित चर्चा कार्यक्रम बताया जा रहा है, जो कश्मीर के कुनन-पोशपोरा घटना की 35वीं बरसी से जुड़ा था। करीब 20–25 कार्यकर्ता परिसर के बाहर इकट्ठा हुए और बाद में अंदर घुसने की कोशिश करते हुए नारेबाजी की। इस दौरान विश्वविद्यालय के साइनबोर्ड पर काली स्याही/पेंट लगाने, लोहे की रॉड से नुकसान पहुंचाने और दीवारों पर ग्रैफिटी लिखने के आरोप लगे हैं। सुरक्षा कर्मियों और एक छात्र के साथ धक्का-मुक्की की भी बात सामने आई है, जिससे हल्की चोटें आईं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर कहा कि संबंधित कार्यक्रम को आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई थी और परिसर में कोई कार्यक्रम आयोजित भी नहीं हुआ। प्रशासन ने जबरन प्रवेश और तोड़फोड़ की घटना की निंदा करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कहा कि इससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ है।
पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और 18 से अधिक एबीवीपी कार्यकर्ताओं को एहतियातन हिरासत में लिया। मामले में अवैध जमावड़ा, जबरन प्रवेश, मारपीट, आपराधिक धमकी और संपत्ति नुकसान जैसी धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
घटना के बाद विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर इसे कैंपस में संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। वहीं एबीवीपी ने अपने पक्ष में कहा कि प्रस्तावित कार्यक्रम सेना और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया जा रहा था, इसलिए विरोध किया गया और संबंधित छात्र समूहों पर कार्रवाई की मांग की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर और इतिहास से जुड़े मुद्दों पर वैचारिक टकराव कई विश्वविद्यालय परिसरों में तनाव का कारण बनता रहा है। इस तरह की घटनाएं कैंपस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद और शैक्षणिक माहौल के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस को और तेज करती हैं।




