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WATCH VIDEO — रोहित शर्मा की जुबान से रिद्धिमान साहा की असली पहचान: शोर से दूर, लेकिन ग्लव्स में बेजोड़

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एबीसी डेस्क 19 दिसंबर 2025

भारतीय क्रिकेट में अक्सर वही नाम सबसे ज्यादा चमकते हैं, जो बल्ले से बड़े शॉट लगाते हैं या मैदान पर आक्रामक अंदाज़ दिखाते हैं। लेकिन विकेट के पीछे चुपचाप, बिना किसी दिखावे के, सालों तक बेहतरीन काम करने वाले रिद्धिमान साहा जैसे खिलाड़ियों की अहमियत अक्सर देर से समझ आती है। टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने अब वही बात खुलकर कह दी है, जो क्रिकेट के जानकार लंबे समय से महसूस करते रहे हैं।

रोहित शर्मा ने रिद्धिमान साहा की विकेटकीपिंग की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि शुद्ध विकेटकीपिंग स्किल्स के मामले में साहा भारत के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर हैं, यहां तक कि एमएस धोनी और ऋषभ पंत से भी आगे। रोहित के शब्द सीधे और दिल से निकले हुए थे— “ऐसा कीपर मैंने कभी नहीं देखा… साहा भारत का बेस्ट विकेटकीपर है, इसमें कोई शक नहीं।”

रोहित ने खास तौर पर भारतीय पिचों पर स्पिन गेंदबाजों के सामने साहा की तकनीक की सराहना की। अश्विन और जडेजा जैसे स्पिनरों की तेज टर्न लेती गेंदों पर लो कैच लेना, बिजली जैसी फुर्ती से स्टंपिंग करना और हर गेंद पर पूरी एकाग्रता बनाए रखना—ये सब साहा की पहचान रही है। विकेट के पीछे उनका रिएक्शन टाइम इतना तेज होता है कि कई बार बल्लेबाज को पता भी नहीं चलता और गिल्लियां बिखर जाती हैं।

इस बात से रविचंद्रन अश्विन भी पूरी तरह सहमत दिखे। अश्विन ने कई बार कहा है कि स्पिन गेंदबाजी के लिए साहा जैसे विकेटकीपर किसी वरदान से कम नहीं होते। गेंदबाजों का भरोसा तभी बनता है, जब पीछे खड़ा कीपर हर मुश्किल गेंद को संभाल ले—और साहा ने यह काम सालों तक किया।

अगर आंकड़ों की बात करें, तो साहा की काबिलियत सिर्फ तारीफों तक सीमित नहीं है। उन्होंने 40 टेस्ट मैचों में 104 बल्लेबाजों को आउट किया, जिसमें 92 कैच और 12 स्टंपिंग शामिल हैं। 2018 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक टेस्ट में 10 कैच लेने वाले वह पहले भारतीय विकेटकीपर बने, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

2019 के एक आंकड़े के मुताबिक, तेज गेंदबाजों के खिलाफ साहा की कैच सफलता दर 96.9% रही, जो उस समय सक्रिय विकेटकीपरों में सबसे बेहतर मानी गई। यही वजह है कि विराट कोहली, रवि शास्त्री और हरभजन सिंह जैसे दिग्गज भी उन्हें भारत का या दुनिया का सर्वश्रेष्ठ “ग्लवमैन” मानते रहे हैं, खासकर घरेलू परिस्थितियों और स्पिन के खिलाफ।

तुलना करें तो एमएस धोनी ने 90 टेस्ट मैचों में 294 डिसमिसल किए, जो संख्या के लिहाज से सबसे आगे हैं। लेकिन धोनी की पहचान कप्तानी और बल्लेबाजी के साथ जुड़ी रही। ऋषभ पंत अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए मशहूर हैं। वहीं साहा को कम मौके मिले—कभी धोनी की छाया में, तो कभी पंत से प्रतिस्पर्धा के चलते। लेकिन प्रति मैच डिसमिसल और तकनीकी शुद्धता के मामले में कई विशेषज्ञ साहा को सबसे ऊपर रखते हैं।

यही वजह है कि रिद्धिमान साहा को अक्सर भारत का सबसे अंडररेटेड क्रिकेटर कहा जाता है। न कोई दिखावा, न सुर्खियों की भूख—बस विकेट के पीछे पूरी ईमानदारी से काम।

रोहित शर्मा की यह बात दरअसल सिर्फ तारीफ नहीं, बल्कि एक सच्चाई की याद दिलाने जैसा है—कि क्रिकेट में महानता हमेशा शोर से नहीं, कभी-कभी खामोशी से भी पहचानी जाती है। और रिद्धिमान साहा उस खामोश महानता का सबसे बेहतरीन उदाहरण हैं।

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