एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 19 फरवरी 2026
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कथित एप्सटीन फाइल को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका द्वारा एप्सटीन से जुड़े दस्तावेज़ों पर कार्रवाई तेज किए जाने और कुछ प्रभावशाली नामों के सामने आने के बाद भारत की ओर से कोई स्पष्ट और मजबूत प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दी। राहुल गांधी ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा, तब प्रधानमंत्री ने “चुप्पी साध ली”, जिससे देश की छवि और हित प्रभावित हुए।
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि यदि किसी भी अंतरराष्ट्रीय जांच या दस्तावेज़ में प्रभावशाली लोगों—चाहे वे कारोबारी हों, मित्र हों या मंत्री—का नाम सामने आता है, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुप्पी और अस्पष्टता से यह संदेश जाता है कि सरकार कठिन सवालों से बच रही है और इससे भारत की वैश्विक साख पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए और जनता को भरोसे में लेना चाहिए। राहुल गांधी के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण कोई समझौता या निर्णय लिया जाता है, तो उसकी जानकारी और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जरूरी है।
वहीं सरकार समर्थक पक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाज़ी बताते हुए कहा कि एप्सटीन से जुड़ी जांच एक अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया है और इसका भारत की नीतियों या फैसलों से सीधा संबंध नहीं है। उनका कहना है कि सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार का समझौता करने का आरोप निराधार है।
विश्लेषकों का मानना है कि एप्सटीन फाइल को लेकर उठे राजनीतिक बयान ने एक बार फिर पारदर्शिता, अंतरराष्ट्रीय दबाव और कूटनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
फिलहाल राहुल गांधी के इस बयान ने विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण की संभावना बनी हुई है।




