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WATCH VIDEO — “AI समिट नहीं, अव्यवस्थित PR तमाशा” — Rahul Gandhi का सीधा हमला, डेटा सुरक्षा और आत्मनिर्भर तकनीक पर उठाए बड़े सवाल

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एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 19 फरवरी 2026

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोडॉग विवाद के बाद AI Impact समिट को लेकर सियासत तेज हो गई है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने समिट को “अव्यवस्थित PR का तमाशा” बताते हुए आरोप लगाया कि देश की प्रतिभा और डेटा का उपयोग वास्तविक नवाचार के बजाय प्रचार के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब भारत के पास विशाल टैलेंट और डेटा संसाधन हैं, तब विदेशी—खासकर चीनी—तकनीकों के प्रदर्शन से आत्मनिर्भरता के दावों की पोल खुलती है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि क्या भारत की टेक्नोलॉजी नीति का उद्देश्य घरेलू रिसर्च और स्टार्टअप को मजबूत करना है या केवल इवेंट आधारित ब्रांडिंग करना। उनके मुताबिक, यदि भारतीय डेटा को सुरक्षा और नवाचार के बजाय बाहरी हितों के लिए खुला छोड़ दिया जाता है, तो यह न केवल डेटा सुरक्षा बल्कि राष्ट्रीय तकनीकी संप्रभुता के लिए भी खतरा बन सकता है। उन्होंने इसे “मौके की बर्बादी” बताते हुए कहा कि सरकार को PR की राजनीति से ऊपर उठकर वास्तविक तकनीकी ढांचा विकसित करना चाहिए।

Indian National Congress ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षा और तकनीकी मंचों को प्रचार का साधन बनाना देश की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाता है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त पारदर्शिता के बड़े-बड़े दावे करना और बाद में विवादों में घिरना, भारत की अकादमिक विश्वसनीयता पर सीधा असर डालता है।

हालांकि सरकार समर्थक पक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए कहा कि भारत का AI और स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से आगे बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी साझेदारी विकास का हिस्सा है। लेकिन राहुल गांधी के हमले ने डेटा सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और वास्तविक नवाचार बनाम प्रचार की बहस को केंद्र में ला दिया है।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि नीति और प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या भारत को “इवेंट आधारित टेक इमेज” से आगे बढ़कर वास्तविक रिसर्च और घरेलू उत्पादन पर ध्यान देने की जरूरत है।

फिलहाल रोबोडॉग विवाद और AI समिट को लेकर उठे सवालों ने सरकार की तकनीकी रणनीति को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी के आक्रामक रुख के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक और तकनीकी विमर्श बनने की संभावना है।

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