Home » International » WATCH VIDEO — मिनाब में मासूमों का कत्लेआम: 165 स्कूली लड़कियों के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब, अमेरिका-इज़राइल पर गुस्सा

WATCH VIDEO — मिनाब में मासूमों का कत्लेआम: 165 स्कूली लड़कियों के जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब, अमेरिका-इज़राइल पर गुस्सा

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान | 4 मार्च 2026

मिनाब में शोक, आक्रोश और राष्ट्रीय एकजुटता

ईरान के दक्षिणी प्रांत होर्मोज़गान प्रांत के मिनाब शहर में मृत छात्राओं और शिक्षकों के लिए निकाला गया जनाज़ा अभूतपूर्व रहा। लाखों लोग सड़कों और सार्वजनिक मैदानों में उमड़ पड़े। ताबूतों को ईरानी झंडे में लपेटा गया था, कई पर मासूम बच्चियों की तस्वीरें सजी थीं। माताएं काले वस्त्रों में विलाप करती दिखाई दीं, जबकि युवा हाथों में बैनर और झंडे लिए न्याय की मांग कर रहे थे। राज्य टेलीविजन ने पूरे जनाज़े का सीधा प्रसारण किया, जिसमें दुआएं, फातिहा और श्रद्धांजलि सभाएं दिखाई गईं। भीड़ में शामिल लोगों ने इसे “राष्ट्र के बच्चों की शहादत” बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया। स्कूलों और सरकारी इमारतों पर झंडे आधे झुका दिए गए। इस जनाज़े को केवल अंतिम विदाई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और प्रतिरोध के प्रदर्शन के रूप में भी देखा गया।

क्या हुआ था 28 फरवरी को?

28 फरवरी 2026 को मिनाब में मिसाइल हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। ईरानी अधिकारियों और राज्य मीडिया के अनुसार, संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली कार्रवाई के दौरान ‘शजारा तय्यबा’ नामक एक प्राइमरी गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया गया। इस हमले में 165 स्कूली छात्राओं और स्टाफ की मौत हुई, जबकि 95 से अधिक लोग घायल हुए। उस समय स्कूल में सुबह की कक्षाएं चल रही थीं और अधिकांश बच्चियां 7 से 12 वर्ष की आयु की थीं।

ईरान ने इस घटना को “नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने” की कार्रवाई करार दिया है। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका विदेश विभाग ने कहा है कि अमेरिकी सेना जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाती और रिपोर्टों की समीक्षा की जा रही है। इज़राइली अधिकारियों ने भी जांच की बात कही है।

राहत और बचाव अभियान

हमले के बाद स्थानीय राहत एजेंसियों, दमकल कर्मियों और स्वयंसेवकों ने घंटों तक मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया। ईरानी रेड क्रिसेंट ने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया, जहां कई की हालत गंभीर बताई गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्कूल भवन का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया था और आसपास के घरों की खिड़कियां भी धमाके से टूट गईं। मलबे के बीच बिखरी किताबें, स्कूल बैग और जूते—इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और जांच की मांग

घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यूनेस्को ने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि स्कूलों को सशस्त्र संघर्ष में संरक्षित माना जाना चाहिए।

कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की है। विश्लेषकों का कहना है कि संघर्ष क्षेत्रों में सैन्य और नागरिक ढांचों की निकटता के कारण तथ्य स्थापित करना कठिन हो जाता है। इंटरनेट और संचार प्रतिबंधों के कारण स्वतंत्र पुष्टि सीमित है, जिससे दावों-प्रतिदावों का सिलसिला जारी है।

युद्ध की मानवीय कीमत

मिनाब की यह घटना युद्ध की मानवीय कीमत का दर्दनाक प्रतीक बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सशस्त्र संघर्ष में सबसे अधिक प्रभावित नागरिक—विशेषकर बच्चे—होते हैं।

ईरान में इसे राष्ट्रीय त्रासदी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि वैश्विक स्तर पर इस पर तीखी बहस जारी है। निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो पाएगा कि जमीनी सच्चाई क्या है, लेकिन फिलहाल मिनाब की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब यह बता रहा है कि इस त्रासदी ने देश की सामूहिक चेतना को गहराई से झकझोर दिया है।

मिनाब की बच्चियों के जनाज़े ने एक बार फिर दुनिया के सामने यह सवाल रख दिया है—युद्ध की आग में आखिर कब तक मासूम जिंदगियां झुलसती रहेंगी?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments