महेंद्र कुमार । नई दिल्ली 14 दिसंबर 2025
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की ‘वोट चोर–गद्दी छोड़’ महा-रैली में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मोदी सरकार, BJP और चुनाव आयोग पर अब तक का सबसे आक्रामक और सीधा हमला बोला। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर BJP में जरा भी हिम्मत है तो एक बार बैलेट पेपर पर निष्पक्ष चुनाव लड़ ले—ये कभी नहीं जीत पाएगी। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि BJP को आज चुनाव जीतने के लिए जनता नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की जरूरत पड़ती है और यही वजह है कि लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर किया जा रहा है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि जब संसद में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने SIR और वोट चोरी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए, तो मोदी सरकार चर्चा से भागती नजर आई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बहानेबाज़ी करते हुए कहा कि पहले ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा होगी, उसके बाद वोट चोरी पर बात होगी। प्रियंका ने कहा, “हम सदन में ‘वंदे मातरम्’ पर चर्चा करते रहे, लेकिन मोदी सरकार में जनता के असली मुद्दों पर बात करने की हिम्मत नहीं दिखी।” उनके मुताबिक, यह सरकार राष्ट्रवाद की आड़ में लोकतांत्रिक सवालों से बचने की राजनीति कर रही है।
रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने पिछले आम चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने ऐसा दौर पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया, कांग्रेस का बैंक अकाउंट बंद कर दिया गया और भ्रष्टाचार के नाम पर बेबुनियाद आरोप लगाए गए। प्रियंका ने तीखे शब्दों में कहा कि जो लोग इस दबाव को झेल नहीं पाए, वे BJP में शामिल हो गए और जैसे ही वे BJP में गए, “BJP की वॉशिंग मशीन में धुलकर एकदम साफ हो गए।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक संस्कृति और कथित दोहरे मापदंडों पर हमला मानी जा रही है।
प्रियंका गांधी ने दोहराया कि BJP को आज चुनाव आयोग के बिना चुनाव जीतने का भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, “आज BJP को चुनाव आयोग की जरूरत है, क्योंकि उसके बिना नरेंद्र मोदी चुनाव नहीं जीत सकते।” उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे खतरनाक दौर बताया और कहा कि इतिहास में पहली बार पूरा विपक्ष एक स्वर में कह रहा है कि उसे चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं रहा। प्रियंका के मुताबिक, चुनाव प्रक्रिया के हर चरण को संदिग्ध बना दिया गया है और यह लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर खतरा है।
प्रियंका गांधी ने मंच से तीन चुनाव आयुक्तों के नाम लेते हुए कहा कि देश इन्हें कभी नहीं भूलेगा—
1. ज्ञानेश कुमार
2. सुखबीर सिंह संधू
3. विवेक जोशी
उन्होंने कहा कि चाहे मोदी सरकार इन्हें बचाने की कितनी भी कोशिश कर ले, एक दिन इन्हें देश को जवाब देना ही होगा। यह बयान सीधे तौर पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल और भविष्य के लिए एक राजनीतिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की नीतियों पर हमला करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि आज देश का युवा बेरोजगारी और पेपर लीक से परेशान है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर बात करने को तैयार नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े एक व्यक्ति पर बेटिंग ऐप घोटाले के गंभीर आरोप हैं, फिर भी संसद में इस पर चर्चा नहीं होती। प्रियंका ने कहा कि मोदी सरकार महंगाई, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों से मुंह मोड़ रही है और हर मोर्चे पर विफल साबित हो चुकी है।
प्रियंका गांधी ने सरकार की नाकामियों की लंबी सूची गिनाते हुए कहा कि
1. डॉलर 90 रुपये के करीब पहुंच गया है
2. विदेश नीति फेल हो चुकी है
3. युवा पेपर लीक से त्रस्त हैं
4. लोग महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं
5. निर्यात घट रहा है और आयात महंगा हो रहा है
6. देश की संपत्तियां अडानी–अंबानी को सौंपी जा रही हैं
उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ सत्ता बचाने में लगी है, देश चलाने में नहीं।
अपने भाषण के अंत में प्रियंका गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई सिर्फ कांग्रेस की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वह डर और दबाव की राजनीति के खिलाफ खड़ी हो और अपने वोट के अधिकार की रक्षा के लिए एकजुट हो। रामलीला मैदान से उठा उनका यह आक्रामक संदेश साफ था—अगर वोट चोरी रुकी नहीं, तो लोकतंत्र ही खत्म हो जाएगा, और कांग्रेस इस लड़ाई को सड़क से संसद तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है।





