राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 5 अप्रैल 2026
कांग्रेस ने एक बार फिर असम की राजनीति में हलचल मचा दी है और मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के चेयरमैन Pawan Khera ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का नाम पहले भी कई विवादों में आता रहा है, लेकिन इस बार जो मुद्दा सामने आया है, वह देश की सीमाओं से बाहर तक जुड़ा हुआ है और बेहद गंभीर है।
पवन खेड़ा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के पास एक नहीं बल्कि तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सामान्य मामला नहीं है, बल्कि इससे कई बड़े सवाल खड़े होते हैं। खेड़ा के अनुसार, पहला पासपोर्ट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का है, जो 14 मार्च 2022 को जारी हुआ और 13 मार्च 2027 तक वैध है। दूसरा पासपोर्ट एंटीगुआ और बारबुडा का बताया गया, जो 26 अगस्त 2021 को जारी हुआ और 25 अगस्त 2031 तक मान्य है। तीसरे पासपोर्ट के रूप में उन्होंने मिस्र (Egypt) का पासपोर्ट बताया, जो 13 फरवरी 2022 को जारी हुआ और 12 फरवरी 2029 तक वैध बताया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर जमीन से जुड़े विवाद, मंदिर के चंदे और सरकारी सब्सिडी से जुड़े आरोप लगते रहे हैं। उनका कहना था कि ये आरोप केवल राजनीतिक बयान नहीं हैं, बल्कि समय-समय पर सामने आए सवालों और चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं। लेकिन इस बार जो दस्तावेज दिखाए गए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर से जुड़े होने के कारण मामले को और गंभीर बना देते हैं।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि अगर ये दस्तावेज सही हैं, तो आखिर एक व्यक्ति के पास एक साथ इतने देशों के पासपोर्ट कैसे हो सकते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह केवल राजनीति का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश के कानून इस तरह की स्थिति को कैसे देखते हैं, यह भी जांच का विषय होना चाहिए।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma या उनकी पत्नी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोपों में सच्चाई क्या है, यह केवल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। किसी भी दस्तावेज की वैधता, उसके जारी होने की प्रक्रिया और संबंधित देशों के नियमों की जांच जरूरी होती है। बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी हो सकती है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक केंद्र में आ चुका है, जहां एक तरफ कांग्रेस गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस पूरे मुद्दे पर कोई आधिकारिक जांच शुरू होती है और आखिर सच्चाई क्या सामने आती है।




