अनिल यादव | लखनऊ 23 दिसंबर 2025
उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को माहौल उस समय और गरमा गया, जब समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 150 साल पूरे होने की चर्चा हो रही है, लेकिन ज़मीन पर हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। रागिनी सोनकर ने सदन में कहा कि सरकार को पहले यह समझना चाहिए कि ‘वंदे मातरम्’ का असली अर्थ क्या है। वंदे मातरम् का मतलब है मां का वंदन—और किसी भी मां की वंदना उसके बच्चों को दुख पहुंचाकर या उन पर अत्याचार करके नहीं की जा सकती।
सपा विधायक ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बच्चों और युवाओं के साथ रोज़ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस देश में लोग “आई लव कृष्ण”, “आई लव जीसस” और “आई लव वाहे गुरु” कह सकते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में “आई लव मोहम्मद” कहने पर बच्चों को गिरफ्तार किया जा रहा है। रागिनी सोनकर ने सवाल उठाया कि क्या यही वंदे मातरम् की भावना है, जहां अभिव्यक्ति की आज़ादी पर इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
रागिनी सोनकर ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जब प्रदेश का युवा रोज़गार मांगता है, तो उस पर डंडे बरसाए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों की मौतों के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं, जबकि जब बाहुबलियों की बात आती है तो उन्हें संरक्षण मिलता है। सपा विधायक का कहना था कि सरकार की प्राथमिकताएं साफ नहीं हैं और आम आदमी, खासकर कमजोर वर्ग, खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।
अपने भाषण के दौरान रागिनी सोनकर ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या यही न्याय है और क्या यही उस भारत की तस्वीर है, जिसकी बात बड़े-बड़े मंचों से की जाती है। उन्होंने कहा कि मां के नाम पर नारे लगाने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि मां के बच्चों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद सदन में कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में अभिव्यक्ति की आज़ादी, कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय को लेकर बहस को तेज कर दिया है। जहां विपक्ष इसे सरकार की नीतियों की विफलता बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इन आरोपों को खारिज करने की तैयारी दिखी। फिलहाल, रागिनी सोनकर के इस बयान ने विधानसभा से बाहर भी सियासी चर्चा को और तेज कर दिया है।




