महेंद्र कुमार | नई दिल्ली | 17 फरवरी 2026
दिल्ली में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सम्मेलन को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कार्यक्रम में कथित कुव्यवस्था और कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस सम्मेलन को “फोटो शूट केंद्र” बना दिया गया, जबकि असली तकनीकी संवाद और नवाचार पीछे छूट गए। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री की एक रील शूट करने के लिए AI Impact Summit का पूरा वेन्यू करीब छह घंटे तक खाली करवाया गया।
सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी दावा किया कि सुरक्षा अधिकारियों ने AI इंजीनियरों से उनके प्रोडक्ट वहीं छोड़कर जाने को कहा और जब वे लौटे तो कुछ कंपनियों के उत्पाद गायब मिले। उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि इससे देश की छवि को नुकसान पहुंचा है। साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपनी वीडियो शूट के लिए इस तरह की व्यवस्था नहीं करवाई।
कांग्रेस प्रवक्ता के मुताबिक, प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से पहले मुख्य हॉल खाली कराया गया, जिससे कई तय सत्र प्रभावित हुए। कुछ टेक उद्यमियों को उनके किराए पर लिए गए स्टॉल से हटाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा इंटरनेट कनेक्टिविटी बाधित होने के कारण कई लाइव डेमो सफल नहीं हो सके।
प्रवेश व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि प्रतिभागियों को अंदर जाने के लिए लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ा। टेक सम्मेलन में लैपटॉप और कैमरों पर प्रतिबंध तथा केवल नकद भुगतान की अनुमति जैसे प्रावधानों को भी कांग्रेस ने असंगत बताया है और इसे डिजिटल इंडिया के दावों के विपरीत बताया है।
इस सम्मेलन का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा किया गया था, जिसकी जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के पास है। कांग्रेस ने मंत्री से पूरे मामले पर जवाब मांगा है और इसे देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा मुद्दा बताया है।
हालांकि, सरकार या मंत्रालय की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आयोजन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से कुछ अस्थायी व्यवस्थाएं की गई थीं और कार्यक्रम तय कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुआ।
फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। विपक्ष जहां इसे कुप्रबंधन बता रहा है, वहीं सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




