अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली/तेल अवीव/तेहरान | 12 अप्रैल 2026
फिर युद्ध की तैयारी? इज़रायली सेना को अलर्ट का आदेश
मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल घिरते नजर आ रहे हैं। इज़रायल के सैन्य प्रमुख ने अपनी सेना को संभावित युद्ध फिर शुरू होने की स्थिति के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। यह संकेत ऐसे समय आया है जब हाल ही में संघर्ष के बाद एक नाजुक युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। सैन्य सूत्रों के हवाले से सामने आई इस जानकारी ने साफ कर दिया है कि इज़रायल किसी भी स्थिति के लिए खुद को तैयार रखना चाहता है—चाहे वह सीमित टकराव हो या फिर व्यापक युद्ध।
दरअसल, इज़रायल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका अभियान खत्म नहीं हुआ है और वह ईरान के खिलाफ अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखना चाहता है। हाल के बयानों में भी यह कहा गया है कि यह संघर्ष अभी “अंतिम चरण” तक नहीं पहुंचा है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई फिर शुरू की जा सकती है।
नाकाम बातचीत ने बढ़ाई चिंता, फिर भड़क सकता है संघर्ष
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एक बड़ा कारण हाल ही में हुई कूटनीतिक कोशिशों की विफलता भी है। अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम वार्ता बिना किसी ठोस समझौते के खत्म हो गई, जिससे तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है।
इन वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। नतीजा यह हुआ कि युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और गहराता गया। ऐसे माहौल में इज़रायल का अपनी सेना को तैयार रहने का आदेश देना इस बात का संकेत है कि हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं।
‘फिंगर ऑन ट्रिगर’: इज़रायल का सख्त रुख
इज़रायल के शीर्ष नेतृत्व ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि युद्धविराम को स्थायी शांति नहीं माना जाना चाहिए। प्रधानमंत्री स्तर से यह संदेश दिया गया है कि देश “फिंगर ऑन ट्रिगर” यानी किसी भी समय कार्रवाई के लिए तैयार है।
इसका सीधा मतलब यह है कि इज़रायल किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। खासतौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके सहयोगी संगठनों को लेकर इज़रायल लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
ईरान भी पूरी तैयारी में, टकराव की जमीन तैयार
दूसरी ओर Iran ने भी साफ संकेत दे दिए हैं कि वह किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी सेना ने हाल ही में अपनी “फुल कॉम्बैट रेडीनेस” का ऐलान किया है, जिससे यह स्पष्ट है कि दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति बेहद खतरनाक है, क्योंकि दोनों देश सीधे टकराव से बचना चाहते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती सैन्य तैयारियां और बयानबाजी हालात को विस्फोटक बना रही हैं।
वैश्विक असर: तेल, व्यापार और कूटनीति पर खतरा
अगर यह तनाव फिर युद्ध में बदलता है, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य—पर पहले ही दबाव बना हुआ है, और किसी भी बड़े टकराव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि तेल की कीमतों में उछाल महंगाई को बढ़ा सकता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, व्यापार और सुरक्षा संतुलन भी इस संघर्ष से प्रभावित होंगे।
युद्धविराम के बाद भी शांति दूर
मौजूदा हालात यह बताते हैं कि भले ही कागजों पर युद्धविराम हो, लेकिन जमीन पर शांति अभी बहुत दूर है। इज़रायल की सैन्य तैयारी और ईरान की जवाबी चेतावनियां इस बात का संकेत हैं कि यह संघर्ष किसी भी वक्त फिर भड़क सकता है।
ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब मध्य पूर्व पर टिकी है—क्योंकि यहां उठने वाली एक चिंगारी वैश्विक स्तर पर बड़ा असर डाल सकती है।




