एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 20 फरवरी 2026
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर इन दिनों एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवती को कथित तौर पर देर रात पार्टी के बाद कार से बाहर निकालकर नाले में फेंकते हुए दिखाया जा रहा है। वीडियो के साथ यह दावा जोड़ा जा रहा है कि यह किसी महानगर में हुई वास्तविक घटना है और इसे महिलाओं की सुरक्षा से जोड़कर भावनात्मक अंदाज़ में साझा किया जा रहा है। कई यूज़र्स ने इसे कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाने और समाज में बढ़ते अपराध का उदाहरण बताते हुए शेयर किया, जिससे वीडियो को व्यापक प्रसार मिला।
हालांकि, तथ्य-जांच में सामने आया है कि वायरल दावा पूरी तरह भ्रामक है। जांच के दौरान वीडियो के प्रमुख फ्रेम्स को रिवर्स सर्च तकनीक से खंगाला गया और पाया गया कि यह क्लिप किसी वास्तविक घटना का नहीं, बल्कि एक फिल्मी दृश्य का हिस्सा है। यह वीडियो पहले भी इंटरनेट पर अलग-अलग संदर्भों में मौजूद रहा है और इसे मनोरंजन सामग्री के रूप में अपलोड किया गया था। हालिया वायरल पोस्ट में उसी वीडियो को अलग कैप्शन के साथ साझा कर वास्तविक घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि वीडियो में दिख रहे दृश्य के साथ जो स्थान, तारीख और घटना का विवरण जोड़ा जा रहा है, उसका किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या विश्वसनीय समाचार स्रोत से कोई संबंध नहीं है। न तो किसी पुलिस विभाग ने ऐसी घटना की पुष्टि की है और न ही किसी प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ने इस तरह की घटना की रिपोर्टिंग की है। इसके बावजूद, सनसनीखेज दावे और भावनात्मक भाषा के कारण यह वीडियो लोगों को भ्रमित करने में सफल रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के वीडियो अक्सर संदर्भ से काटकर या भ्रामक कैप्शन के साथ शेयर किए जाते हैं, जिससे सामाजिक तनाव और डर का माहौल पैदा होता है। खासकर महिलाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भ्रामक सामग्री तेज़ी से वायरल होती है, क्योंकि लोग बिना पुष्टि किए उसे आगे बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि तथ्य-जांच संस्थाएं लगातार लोगों से अपील करती रही हैं कि किसी भी वीडियो या पोस्ट को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
नाइट पार्टी के बाद लड़की को नाले में फेंके जाने का जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, वह किसी वास्तविक घटना का प्रमाण नहीं है। यह एक फिल्मी दृश्य है जिसे भ्रामक दावे के साथ प्रसारित किया जा रहा है। ऐसे मामलों में सतर्क रहना और विश्वसनीय स्रोतों से पुष्टि करना ही गलत सूचना के प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।




