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यमन में फिर भड़की हिंसा, सऊदी और UAE समर्थित गुट आमने-सामने

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 3 जनवरी 2026

सहयोग से टकराव तक: कैसे बिगड़े रिश्ते

यमन में जारी लंबे गृहयुद्ध ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताज़ा झड़पों में सऊदी अरब समर्थित बल और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित बल आमने-सामने आ गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह टकराव सिर्फ़ स्थानीय लड़ाई नहीं है, बल्कि इसके पीछे क्षेत्रीय शक्तियों के आपसी हित और रणनीतिक मतभेद भी साफ़ झलकते हैं। जिन ताकतों को कभी हूती विद्रोहियों के खिलाफ़ एक ही खेमे में माना जाता था, वही अब एक-दूसरे के सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं। यमन युद्ध की शुरुआत में सऊदी अरब और UAE एक ही सैन्य गठबंधन का हिस्सा थे और उनका साझा लक्ष्य हूती विद्रोहियों को रोकना था। लेकिन समय के साथ ज़मीनी सच्चाई बदलती चली गई। दक्षिण यमन में प्रभाव, बंदरगाहों और रणनीतिक इलाकों पर नियंत्रण को लेकर मतभेद गहराते गए। अब हालात यह हैं कि दोनों देशों के समर्थन से चलने वाले स्थानीय सशस्त्र गुट सीधे भिड़ रहे हैं, जिससे यह साफ़ हो गया है कि गठबंधन के भीतर की दरार अब खुलकर सामने आ चुकी है।

झड़पों से बढ़ी अस्थिरता, आम लोग फिर फंसे

इन झड़पों का सबसे बड़ा खामियाजा एक बार फिर आम यमनी नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। जिन इलाकों में सऊदी और UAE समर्थित गुटों के बीच संघर्ष हुआ है, वहां सुरक्षा हालात बिगड़ गए हैं। पहले से ही भुखमरी, बीमारी और आर्थिक तबाही से जूझ रहे लोगों के लिए यह नई हिंसा डर और अनिश्चितता लेकर आई है। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, कई इलाकों में आवाजाही बाधित हुई है और लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

यमन संकट की जटिल होती तस्वीर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव यमन संकट को और जटिल बना देगा। अब यह सिर्फ़ हूती बनाम सरकार या बाहरी हस्तक्षेप का मामला नहीं रहा, बल्कि उन ताकतों के बीच भी संघर्ष उभर रहा है, जो कभी सहयोगी थीं। इससे किसी राजनीतिक समाधान की राह और कठिन होती जा रही है और शांति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्षेत्रीय संदेश और आगे की चिंता

सऊदी और UAE समर्थित बलों की यह भिड़ंत पूरे पश्चिम एशिया के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है। यह दिखाता है कि यमन युद्ध सिर्फ़ एक देश का संकट नहीं रहा, बल्कि क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा का मैदान बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बार फिर संयम और संवाद की अपील कर रहा है, लेकिन ज़मीन पर हालात बताते हैं कि यमन में शांति अभी भी दूर की मंज़िल है।

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