Home » National » मनरेगा पर ‘VB–G RAM G’ हमला: गांधी का नाम मिटाकर गरीबों का हक छीनने की साजिश—कांग्रेस का BJP-RSS पर सीधा आरोप

मनरेगा पर ‘VB–G RAM G’ हमला: गांधी का नाम मिटाकर गरीबों का हक छीनने की साजिश—कांग्रेस का BJP-RSS पर सीधा आरोप

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

अवधेश कुमार | नई दिल्ली, 16 दिसंबर 2025

कांग्रेस ने मनरेगा (MGNREGA) के नाम बदलने और प्रस्तावित संशोधनों को भारतीय संविधान, श्रम अधिकारों और संघीय ढांचे पर सीधा हमला करार देते हुए BJP-RSS पर तीखा और आक्रामक प्रहार किया है। पार्टी का कहना है कि ‘VB–G RAM G Bill’ महज़ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि महात्मा गांधी की विरासत को सार्वजनिक जीवन से मिटाने, अधिकार-आधारित कल्याण को खत्म करने और केंद्र-नियंत्रित “चैरिटी मॉडल” थोपने की सुनियोजित कोशिश है। कांग्रेस के अनुसार, यह हमला उस नैतिक और दार्शनिक आधार पर है, जिस पर देश के सबसे बड़े रोजगार-गारंटी कार्यक्रम की नींव रखी गई थी—जहां काम “मेहरबानी” नहीं, बल्कि नागरिक का अधिकार है।

लोकसभा में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिल का विरोध करते हुए इसे “गंभीर रूप से प्रतिगामी और खतरनाक” बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता के नाम को हटाना केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि कार्यक्रम की आत्मा पर वार है। गांधी का ‘रामराज्य’ कोई सत्तात्मक नारा नहीं, बल्कि ग्राम-स्वराज, अंतिम पंक्ति के आदमी को पहले रखने और रोजगार-आधारित सशक्तिकरण का सामाजिक-आर्थिक खाका था। मूल कानून में गांधी का नाम इसी ऐतिहासिक और नैतिक संबंध की स्वीकृति था। नाम हटाना इस योजना से उसका नैतिक कम्पास और ऐतिहासिक वैधता छीनने जैसा है।

कांग्रेस ने बिल के वित्तीय ढांचे पर भी तीखा सवाल उठाया। पार्टी का आरोप है कि राज्यों पर 40 प्रतिशत वित्तीय बोझ डालना न सिर्फ गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि गरीब राज्यों के लिए योजना को अव्यावहारिक बना देगा। इससे मजदूरी भुगतान में देरी, कार्यदिवसों में कटौती और अंततः योजना के क्षरण का रास्ता खुलेगा। मांग-आधारित योजना को बजट-कैप में कैद करना सार्वभौमिक कवरेज और “काम के अधिकार” की अवधारणा को ध्वस्त करता है—जो सीधे-सीधे राजकोषीय संघवाद का उल्लंघन है।

कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने संसद में सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा आम आदमी का रोजगार-अधिकार है, लेकिन नए बिल के बाद यह अधिकार कागज़ी बनकर रह जाएगा। 125 दिनों के काम का वादा खोखला है, क्योंकि वास्तविक जिम्मेदारी राज्यों पर डाल दी गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कृषि मंत्री का नाम इतिहास में इस कारण दर्ज होगा कि उन्होंने गांधी से प्रेरित योजना से राष्ट्रपिता का नाम हटाने वाला बिल पेश किया।

संसद के भीतर बहस के दौरान भाजपा सांसदों की टिप्पणी—“महात्मा गांधी आपके परिवार के नहीं थे”—पर प्रियंका गांधी का जवाब राजनीतिक बयान से आगे जाकर राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति बन गया। उन्होंने कहा, “महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, लेकिन मेरे परिवार जैसे ही थे—और पूरे देश की यही भावना है।” विपक्ष ने इसे गांधी को किसी एक परिवार तक सीमित करने की कोशिश पर करारा तमाचा बताया।

सड़कों से संसद तक विरोध तेज है। विपक्षी दलों ने मकर द्वार से गांधी प्रतिमा तक पैदल मार्च निकाला, गांधी की तस्वीरें हाथ में लेकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि ‘VB–G RAM G Bill’ गरीबों, मजदूरों और राज्यों के अधिकारों पर सीधा वार है। कांग्रेस ने 17 दिसंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर और 28 दिसंबर—पार्टी के स्थापना दिवस—पर मंडलों व गांवों में गांधी के चित्रों के साथ कार्यक्रमों का ऐलान किया है। पार्टी का संदेश साफ है: यह लड़ाई राजनीतिक ही नहीं, नैतिक है—और तब तक जारी रहेगी, जब तक मनरेगा, गांधी की विरासत और संविधान में निहित सामाजिक न्याय की गारंटी सुरक्षित नहीं हो जाती।

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments