जोधपुर 3 सितम्बर 2025
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने जोधपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के साथ करीब 20-25 मिनट तक मुलाकात की, जिसने राजनीतिक गलियारों में जोरदार हलचल मचा दी है। राजे पिछले डेढ़ वर्ष से राजनीतिक रूप से कम सक्रिय थीं, लेकिन इस मुलाकात ने उनकी राजनीतिक वापसी के संकेत को मजबूत कर दिया है। वे हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से भी मिल चुकी हैं, जिससे यह बात और गंभीर हो गई है कि भाजपा उन्हें पार्टी में एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है।
मुलाकात जोधपुर के लाल सागर स्थित आदर्श डिफेंस एंड स्पोर्ट्स एकेडमी में हुई, जहां संघ प्रमुख डॉ. भागवत 5 से 7 सितंबर तक होने वाली अखिल भारतीय समन्वय बैठक के लिए ठहरे हुए हैं। इस दौरान संघ परिवार के शीर्ष नेता भी मौजूद हैं। राजे और भागवत के बीच करीब 20-25 मिनट चली बातचीत के बाद राजनीतिक अटकलों ने तूल पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में राजस्थान भाजपा संगठन में संभावित बदलाव और राष्ट्रीय नेतृत्व की नई जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।
राजस्थान की राजनीति में यह मुलाकात बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, खासकर तब जब राजे पार्टी में कुछ समय से सक्रिय नहीं थीं। वे हाल ही में एक धार्मिक कार्यक्रम में कह चुकी हैं कि “वनवास आता है तो जाता भी है,” जो उनकी राजनीतिक वापसी का संकेत माना जा रहा है। इस मुलाकात के बाद भाजपा के अंदर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कयास तेज हो गए हैं।
सियासी जानकारों का कहना है कि आरएसएस प्रमुख का समर्थन मिलने पर वसुंधरा राजे का प्रभाव पार्टी में बढ़ेगा, जिससे शिवराज सिंह चौहान जैसे दिग्गज नेताओं के साथ टकराव की संभावनाएं भी बन रही हैं। यह मुलाकात न केवल राजस्थान की राजनीति में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा के नेतृत्व ढांचे में बदलाव का संदेश देती है।
ऐसे में भाजपा के विरोधी और पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों में यह बदलाव एक सियासी तूफान की तरह देखा जा रहा है। राजे की वापसी से भाजपा की रणनीति और संगठनात्मक समीकरणों में बड़े बदलाव आ सकते हैं, जो आगामी चुनावों में पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।




