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यूपी के सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य — योगी आदित्यनाथ

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लखनऊ 10 नवंबर 2025

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और व्यापक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा है कि अब सभी सरकारी, निजी, सहायता-प्राप्त स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम का वैचारिक प्रतीक है, और इसका नियमित गायन छात्रों में देशभक्ति, अनुशासन, मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस आदेश का पालन हर संस्थान में सुनिश्चित किया जाए और इसे दैनिक प्रार्थना-सत्र तथा शैक्षणिक दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बनाया जाए। सरकार का मानना है कि सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और बच्चों में नागरिक चेतना पैदा करने के लिए यह कदम अत्यंत आवश्यक है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश किसी धर्म, जाति या पंथ से ऊपर है, और किसी को भी “विभाजनकारी विचारधारा” फैलाकर समाज में नफरत पैदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस प्रकार की सोच “नए जिन्ना” पैदा करती है और इसे रोकना आवश्यक है। उनकी यह टिप्पणी शिक्षा नीति और राजनीतिक विमर्श दोनों में गूंज पैदा कर रही है, क्योंकि यह फैसला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि संस्कृति, राष्ट्रवाद और शिक्षा के संगम पर लिया गया निर्णय है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि छात्रों को ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ, इतिहास और साहित्यिक महत्व भी समझाया जाए ताकि यह मात्र औपचारिकता न रहकर एक संवेदनशील, भावनात्मक और वैचारिक अभ्यास बन सके।

इस आदेश के लागू होने के बाद स्कूलों में प्रार्थना-सभा की संरचना में बदलाव आएगा, शिक्षकों पर नई जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी और शिक्षा विभाग को निगरानी के नए मानक बनाने होंगे। जबकि कई विशेषज्ञ इसे छात्रों में राष्ट्र-चेतना जगाने की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हैं, कुछ शिक्षाविद विविध पृष्ठभूमियों वाले छात्रों की संवेदनाओं को संतुलित करने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करते हैं। फिर भी सरकार का रुख साफ है—‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्र-गौरव का प्रतीक मानते हुए इसे विवाद रहित, सर्वमान्य और सर्व-समावेशी बनाया जाए।

इस निर्णय का व्यापक प्रभाव आने वाले महीनों में दिखाई देगा। यदि इसे सुव्यवस्थित प्रशिक्षण, संवाद और संवेदनशीलता के साथ लागू किया गया, तो यह कदम शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, राष्ट्रीय भावना और सांस्कृतिक एकता को मजबूत कर सकता है। उत्तर प्रदेश के हज़ारों स्कूल और कॉलेज इस नए बदलाव को कैसे अपनाते हैं, और यह बच्चों के व्यक्तित्व-विकास तथा शैक्षणिक वातावरण पर किस रूप में असर डालता है—यह आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण सामाजिक अवलोकन का विषय बनेगा।

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