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14 साल का तूफ़ान है वैभव सूर्यवंशी : संजू सैमसन

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नई दिल्ली 10 अगस्त 2025

पूर्व भारतीय गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन से एक खास बातचीत की। इस दौरान सैमसन ने उन पलों का जिक्र किया जो उनके क्रिकेटिंग सफर में गहरे असर छोड़ गए। उन्होंने 1998 में शारजाह में सचिन तेंदुलकर की धधकती पारी को याद किया, जिसमें ‘डेजर्ट स्टॉर्म’ की गूंज अब भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में है। इसके साथ ही, उन्होंने ब्रायन लारा की इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में खेली गई 400 रनों की ऐतिहासिक पारी का भी उल्लेख किया—एक ऐसी उपलब्धि जो आज भी रिकॉर्ड बुक में गर्व से दर्ज है। लेकिन इन गुजरे सुनहरे पलों के बीच सैमसन का चेहरा तब सबसे ज्यादा चमक उठा, जब उन्होंने मौजूदा दौर में उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी के बारे में बात की।

संजू सैमसन ने कहा कि वैभव में वह निडरता, तकनीकी सटीकता और मानसिक मजबूती है, जो बड़े खिलाड़ियों में देखने को मिलती है। उन्होंने खासतौर पर उस मैच का जिक्र किया, जहां मात्र 14 साल की उम्र में वैभव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेंदबाजों के सामने बेखौफ होकर खेल दिखाया। “पहली गेंद पर उसने छक्का लगाया तो मुझे लगा किस्मत का मामला होगा, लेकिन उसके बाद हर शॉट में जिस तरह की सोच और नियंत्रण था, उसने मुझे पूरी तरह चौंका दिया,” सैमसन ने कहा।

सैमसन के मुताबिक, वैभव की बल्लेबाजी केवल आक्रामकता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसमें खेल की गहरी समझ भी झलक रही थी। वह हर गेंदबाज के अनुसार अपने शॉट बदलता, तेज गेंदबाजों को आत्मविश्वास से खेलता और स्पिन के खिलाफ बेहतरीन फुटवर्क का इस्तेमाल करता। मैदान पर उसकी पारी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया—तीन गेंदों में चौका, छक्का और फिर दो रन लेकर उसने न सिर्फ स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाया, बल्कि दर्शक दीर्घा और डगआउट दोनों से जोरदार तालियां भी बटोरीं।

यह प्रदर्शन सैमसन के लिए सिर्फ एक मैच की कहानी नहीं था, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की एक झलक थी। उन्होंने कहा, “उसकी उम्र चाहे 14 साल हो, लेकिन उसका आत्मविश्वास और खेल का स्तर ऐसे है जैसे वह सालों से पेशेवर क्रिकेट खेल रहा हो।” सोशल मीडिया पर वैभव सूर्यवंशी का नाम छा गया, और क्रिकेट प्रशंसक उसकी तुलना विराट कोहली और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों से करने लगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैभव को सही मार्गदर्शन और निरंतर अवसर मिले, तो आने वाले वर्षों में वह भारतीय क्रिकेट का एक अहम चेहरा बन सकता है—ठीक वैसे ही जैसे शारजाह में सचिन और टेस्ट में लारा ने अपनी छाप छोड़ी थी।

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