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उत्तरायण: आसमान में रंग, धरती पर उत्सव और जिम्मेदारी का संदेश

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गुजरात का प्रसिद्ध उत्तरायण पर्व हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 14 जनवरी 2025 को रंग-बिरंगी पतंगों, पारंपरिक पकवानों और लोक-संगीत के साथ बड़े हर्षोल्लास और उत्साह से मनाया गया। उत्तरायण केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि गुजरात की सांस्कृतिक आत्मा का उत्सव है। यह वह दिन होता है जब गुजरात के गांवों से लेकर महानगरों तक, हर गली और छत से “काइट फाइट” की आवाज़ें गूंजती हैं, और पूरा राज्य जैसे एक साथ आकाश में अपनी खुशियां उड़ाता है। 

इस दिन सुबह से ही लोगों ने छतों पर जमा होकर पतंगबाजी शुरू कर दी। बाजारों में कई दिन पहले से ही रंगीन कागज़, धागे और मंझे की दुकानों पर भीड़ देखी गई थी। विशेषकर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव जो अहमदाबाद के रिवरफ्रंट पर आयोजित किया गया, उसमें देश-विदेश से आए पतंग उड़ाने वाले प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस वर्ष महोत्सव में 22 देशों से 120 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने अपनी अनोखी और विशाल पतंगों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। 

इस पर्व का एक अहम सामाजिक पहलू यह है कि यह सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोगों को एक साथ जोड़ता है। छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, शहर-गांव सभी एक ही आसमान के नीचे, एक ही उमंग से इस पर्व का आनंद उठाते हैं। घरों में तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, उंधियू और जलेबी जैसी पारंपरिक मिठाइयों और पकवानों का विशेष महत्व रहता है। यह पर्व सूर्य की उत्तरायण यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है और नए ऊर्जा, नई शुरुआत का संदेश देता है। 

हालांकि, इस उत्सव की खुशियों के बीच कुछ गंभीर चुनौतियां भी सामने आईं। पतंगबाजी के दौरान चाइनीज़ मांझा और अन्य धारदार धागों के कारण कई पक्षी घायल हो गए, और कुछ लोगों को भी गले और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। गुजरात फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और एनजीओ जैसे करुणा फाउंडेशनऔर जिवदयने संयुक्त अभियान चलाकर पक्षी बचाव हेल्पलाइन, रेस्क्यू वैन, और बर्ड हस्पताल की व्यवस्था की। इसके अलावा, सरकार ने चाइनीज़ मंझा पर पूर्ण प्रतिबंध, सुरक्षा जागरूकता अभियान, और ड्रोन निगरानी जैसे उपाय अपनाए ताकि हादसों को टाला जा सके। 

अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट, सूरत और गांधीनगर जैसे शहरों में प्रशासन द्वारा विशेष पुलिस पेट्रोलिंग, ट्रैफिक नियंत्रण, और एंबुलेंस सेवाओं को भी तैनात किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जनता से अपील की कि वे उत्सव की खुशी मनाएं लेकिन नियमों का पालन करते हुए, ताकि यह पर्व सभी के लिए सुरक्षित और सुखद रहे। 

इस वर्ष का उत्तरायण एक ओर जहां उल्लास और उमंग का उत्सव बना, वहीं सामाजिक जिम्मेदारी, सुरक्षा और पर्यावरण-संवेदनशीलता का संदेश भी लेकर आया। इसने यह स्पष्ट कर दिया कि परंपरा और प्रगति दोनों साथ चल सकती हैं, बशर्ते हम अपने उत्सवों को चेतना और जागरूकता के साथ मनाएं। 

उत्तरायण 2025 निश्चित रूप से गुजरात की आकाशगंगा में इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज होने वाला एक पर्व बन गया जहां पतंगों ने केवल आकाश नहीं छुआ, बल्कि दिलों को भी जोड़ा। 

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