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अमेरिका–वेनेज़ुएला प्रकरण: अंतरराष्ट्रीय क़ानून कुचले गए, संवाद ही रास्ता—दादागिरी नहीं : कांग्रेस

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अवधेश कुमार | नई दिल्ली | 6 जनवरी 2026

मोदी की चुप्पी बनाम विपक्ष की मुखर आवाज़

वेनेज़ुएला के घटनाक्रम पर भारत सरकार ने एक बार फिर औपचारिक और सतर्क कूटनीतिक बयान देकर अपनी बात समाप्त कर दी, लेकिन कांग्रेस ने इस चुप्पी को गंभीर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि जब किसी संप्रभु देश में एकतरफ़ा कार्रवाई कर अंतरराष्ट्रीय नियमों को नज़रअंदाज़ किया जाए, तब केवल संतुलन साधने वाले शब्द काफ़ी नहीं होते। पार्टी ने अमेरिका की कार्रवाई पर खुलकर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह सिर्फ़ विदेश नीति का विषय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, लोकतंत्र और देशों की स्वतंत्रता से जुड़ा बुनियादी सवाल है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वेनेज़ुएला में अमेरिका द्वारा उठाए गए हालिया कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय संधियों की भावना के खिलाफ़ हैं। पार्टी का कहना है कि अगर ताक़तवर देश अपनी सुविधा के अनुसार नियम तोड़ते रहेंगे, तो अंतरराष्ट्रीय क़ानून का अस्तित्व केवल काग़ज़ों तक सीमित रह जाएगा। कांग्रेस के मुताबिक हाल की घटनाओं ने नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संप्रभुता पर चोट, वैश्विक स्थिरता पर असर

कांग्रेस ने ज़ोर देकर कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का सम्मान ही द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था की नींव है। अमेरिका की एकतरफ़ा कार्रवाई इस नींव को कमजोर करती है। पार्टी ने चेताया कि यदि संयुक्त राष्ट्र की मंज़ूरी के बिना ऐसे कदम उठाए जाते रहे, तो दुनिया फिर उस दौर की ओर लौट सकती है जहां क़ानून नहीं, बल्कि ताक़त ही फ़ैसले करती है। कांग्रेस के अनुसार यह केवल वेनेज़ुएला का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता से जुड़ा मामला है।

फ़ैसला जनता का, संसाधन भी उन्हीं के

कांग्रेस ने साफ़ कहा कि वेनेज़ुएला के भविष्य का निर्णय किसी बाहरी ताक़त को नहीं करना चाहिए। यह अधिकार केवल और केवल वहां की जनता का है। पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वेनेज़ुएला के तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर किसी भी विदेशी देश की नज़र स्वीकार्य नहीं है। ये संसाधन वेनेज़ुएलावासियों के जीवन, रोज़गार, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए हैं—न कि किसी वैश्विक शक्ति के रणनीतिक या कारोबारी लाभ के लिए।

आम लोगों की पीड़ा सबसे बड़ी क़ीमत

कांग्रेस ने यह भी कहा कि हर बाहरी हस्तक्षेप की सबसे भारी क़ीमत आम नागरिक चुकाते हैं। खाने-पीने की कमी, दवाओं का अभाव और असुरक्षा का डर—इन सबसे महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी कार्रवाइयों में मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया है और सत्ता की भाषा इंसान की तकलीफ़ को पीछे छोड़ देती है।

दबाव नहीं, बातचीत ही समाधान

अपने बयान के अंत में कांग्रेस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वेनेज़ुएला संकट का हल धमकी, प्रतिबंध या सैन्य दबाव से नहीं, संवाद और कूटनीति से निकाला जाए। पार्टी ने साफ़ कहा कि आज दुनिया को यह तय करना होगा कि वह अंतरराष्ट्रीय क़ानून और इंसानियत के साथ खड़ी होगी या ताक़त की दादागिरी के साथ। कांग्रेस का संदेश स्पष्ट है—अगर आज वेनेज़ुएला की संप्रभुता को कुचला गया, तो कल कोई भी देश सुरक्षित नहीं रहेगा।

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