आलोक कुमार | नई दिल्ली 21 नवंबर 2025
अमेरिकी संसद के लिए तैयार की गई U.S.-China Economic and Security Review Commission की 2025 वार्षिक रिपोर्ट ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और हालिया सैन्य टकरावों पर एक बड़ा भूचाल ला दिया है। 300 से अधिक पन्नों की यह रिपोर्ट न केवल चीन की आक्रामक रणनीतियों का खुलासा करती है, बल्कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष को लेकर बेहद चौंकाने वाले दावे भी करती है। रिपोर्ट के पृष्ठ 108 से 110 तक के हिस्से में भारत की सैन्य स्थिति और मोदी सरकार की रणनीतिक चूकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में खड़ा किया गया है।
रिपोर्ट में साफ लिखा है कि चीन ने पाकिस्तान के सैन्य संकट का इस्तेमाल अपनी नई हथियार तकनीक का परीक्षण और प्रदर्शन करने के लिए किया—और पाकिस्तान की ओर से इस्तेमाल हुए चीनी हथियारों ने इस सीमित युद्ध को “बीजिंग की क्षमताओं का शोकेस” बना दिया। रिपोर्ट बताती है कि यह संघर्ष भारत द्वारा पहलगाम में हुए इंसर्जेंट अटैक, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे, के जवाब में शुरू हुआ। वही हमला जिसे भारत ने पाकिस्तान-प्रायोजित “आतंकी हमला” बताया था, लेकिन अमेरिकी रिपोर्ट इसे ‘insurgent attack’ कहकर परिभाषित करती है—यानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आधिकारिक कथा को कठोर चुनौती।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत और पाकिस्तान ने 50 वर्षों में पहली बार एक-दूसरे की सीमाओं के भीतर इतनी गहराई तक हमले किए, और इस दौरान पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की गई चीनी मिसाइलें, एयर-डिफेंस सिस्टम और J-10 लड़ाकू विमान सक्रिय युद्ध में शामिल रहे। ये हथियार न केवल भारतीय राफेल विमानों को निशाना बनाने के लिए उपयोग हुए, बल्कि चीन ने युद्ध के तुरंत बाद इसे एक ‘success story’ की तरह प्रचारित किया ताकि अन्य देशों को चीनी हथियारों की बिक्री बढ़ाई जा सके। इतना ही नहीं, रिपोर्ट के अनुसार चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अभियान चलाकर फ्रांसीसी राफेल की छवि खराब करने और अपने J-35 लड़ाकू विमान को बढ़ावा देने की कोशिश की।
भारत के लिए सबसे शर्मनाक हिस्सा वह है जिसमें कहा गया है कि इस संघर्ष के दौरान चीनी इंटेलिजेंस और टैक्टिकल सपोर्ट ने पाकिस्तान को ‘live inputs’ दिए—एक ऐसा आरोप जो भारतीय सेना के लिए रणनीतिक खतरे की घंटी है। रिपोर्ट का यह दावा भारत की खुफिया और सैन्य तैयारी पर सीधे सवाल उठाता है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि चीन और पाकिस्तान ने 2024–25 के दौरान संयुक्त सैन्य अभ्यासों में पहले से ही उन परिस्थितियों का अभ्यास किया था जिनका इस्तेमाल उन्होंने भारत के खिलाफ वास्तविक संघर्ष में किया।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही विश्व मीडिया में हलचल है। बांग्ला के प्रसिद्ध ‘आনন্দবাজার’ ने रिपोर्ट से जुड़े हिस्सों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है, वहीं WION ने डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि मोदी ने खुद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति को फ़ोन कर “राजनीतिक करियर पर असर पड़ने” की बात कही थी। Mint ने इसे भारत की कूटनीतिक विफलता बताते हुए सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार ने 2025 के इस संघर्ष में भारत की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने गलत तरह से पेश किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक छवि और विदेश नीति की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आलोचकों ने कहना शुरू कर दिया है कि अब मोदी का राजनीतिक भविष्य सिर्फ ‘VoteChori’ पर टिका है, क्योंकि रिपोर्ट के सामने आने के बाद न तो ‘56 इंच’ की कथा बचती दिखती है और न ही ‘मजबूत राष्ट्रवाद’ का दावा।
इस पूरी रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक मुहर हासिल है, और इसकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। इसलिए आने वाले दिनों में भारत की राजनीति, सुरक्षा प्रतिष्ठान और विदेश नीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।







