अंतरराष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली / वॉशिंगटन / तेहरान | 8 अप्रैल 2026
करीब 40 दिनों से जारी अमेरिका–ईरान युद्ध के बीच घोषित सीजफायर ने भले ही वैश्विक स्तर पर राहत की एक हल्की उम्मीद जगाई हो, लेकिन ज़मीनी सच्चाई अब भी बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बनी हुई है। अमेरिकी सेना के एक वरिष्ठ जनरल ने साफ शब्दों में कहा है कि यह सीजफायर किसी स्थायी शांति का संकेत नहीं है, बल्कि केवल एक “रणनीतिक विराम” है, जिसके दौरान दोनों पक्ष अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हालात ऐसे हैं कि किसी भी छोटी घटना या उल्लंघन के बाद युद्ध फिर से पूरी तीव्रता के साथ शुरू हो सकता है, क्योंकि न तो सेनाएं पीछे हटी हैं और न ही हथियारों की तैनाती में कोई कमी आई है।
इस दो सप्ताह के सीजफायर के पीछे मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बना वैश्विक दबाव है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। ईरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को बंद किए जाने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई थी और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा था। अब इसे आंशिक रूप से खोलने पर सहमति बनी है, लेकिन शिपिंग कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संस्थाएं अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। समुद्री मार्गों पर सैन्य निगरानी बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि स्थिति सामान्य होने से अभी काफी दूर है।
अमेरिकी सैन्य नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में उनकी सभी सैन्य इकाइयां “हाई अलर्ट” पर हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर्स, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स को सक्रिय रखा गया है, वहीं ईरान की ओर से भी अपने रणनीतिक ठिकानों और हथियार प्रणालियों को पूरी तरह सतर्क स्थिति में रखा गया है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि यह सीजफायर केवल युद्ध के बीच एक ठहराव है, न कि संघर्ष का अंत।
इस बीच, कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज हुई है और पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बातचीत का रास्ता तैयार करने की कोशिश की है। इस्लामाबाद में संभावित वार्ता की चर्चा भी सामने आई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव जैसे मूल मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, तब तक इस तरह के सीजफायर लंबे समय तक टिक नहीं सकते। इजरायल की भूमिका और पश्चिम एशिया में चल रहे अन्य तनाव भी इस पूरे समीकरण को और जटिल बना रहे हैं। मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि सीजफायर ने केवल तत्काल टकराव को टालने का काम किया है, लेकिन युद्ध का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अमेरिकी जनरल का बयान इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों पक्ष किसी भी संभावित संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार हैं और आने वाले दिन इस पूरे क्षेत्र के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।




