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बीजेपी सरकार के विकास में उद्घाटन के फूल सूखने से पहले ही धँस जाती है सड़क, टूट जाते हैं पुल —अखिलेश यादव

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राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | लखनऊ | 5 अप्रैल 2026

“उद्घाटन के फूल सूखने से पहले ही धँस जाती है सड़क, टूट जाते हैं पुल!”—इसी तीखे और व्यंग्य से भरे अंदाज में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने बीजेपी सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आज जनता खुद पूछ रही है कि आखिर ऐसा कौन-सा विकास हो रहा है, जिसमें नई-नई बनी परियोजनाएं कुछ ही दिनों में जवाब दे देती हैं और मजबूती के दावे हवा हो जाते हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि नई बनी सड़कें कुछ ही समय में अपनी “मजबूती” का राज खोल देती हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ग्रीन कॉरिडोर का नाम तो बहुत बड़ा रखा जाता है, लेकिन कुछ ही दिनों में वह “विलीन कॉरिडोर” बन जाता है। यानी बनने के बाद गायब होने की रफ्तार इतनी तेज है कि नाम बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

उन्होंने पुलों को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि जनता अब डर के साथ सफर कर रही है—क्योंकि पुल कब “थककर बैठ जाए” इसका कोई भरोसा नहीं है। हाईवे पर चलते हुए लोगों को अब “हाय-हाय” करने की नौबत आ जाती है, क्योंकि गड्ढे और टूट-फूट यात्रा को आसान नहीं बल्कि जोखिम भरा बना देते हैं।

अखिलेश यादव ने पानी की टंकियों और सरकारी इमारतों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि टंकियां कभी भी “धराशायी” हो जाती हैं और छतें ऐसे टपकने लगती हैं जैसे किसी को अपना दुख सुना रही हों। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि अगर यही विकास है, तो फिर जनता को मजबूत निर्माण नहीं, बल्कि “इमरजेंसी किट” लेकर चलना पड़ेगा।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब सिर्फ उद्घाटन और फीता काटने से खुश नहीं होती, बल्कि काम की गुणवत्ता देखती है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तय होना चाहिए कि प्राथमिकता असली विकास है या सिर्फ उद्घाटन के रिकॉर्ड बनाना।

हालांकि बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान ने हलचल जरूर बढ़ा दी है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के व्यंग्यात्मक हमले सीधे आम लोगों के अनुभवों से जुड़ते हैं, इसलिए इनका असर भी तेजी से दिखाई देता है।Akhilesh Yadav ने अपने खास अंदाज में विकास कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इन सवालों का जवाब मिलता है या फिर ये भी किसी अधूरे निर्माण की तरह हवा में ही लटके रह जाते हैं।

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