महेंद्र कुमार | नई दिल्ली | 12 जनवरी 2026
कांग्रेस का कहना है कि “BJP के ‘जंगलराज’ में दरिंदों का राज” कोई राजनीतिक नारा भर नहीं, देश की ज़मीन पर उभरती एक भयावह हकीकत का बयान है। पार्टी के मुताबिक, बीते कुछ समय में बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड और ओडिशा जैसे राज्यों से सामने आई बलात्कार, अपहरण और यौन हिंसा की घटनाएं यह दिखाने के लिए काफी हैं कि कानून का डर कमजोर पड़ चुका है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अधिकतर मामलों में पीड़ित लड़कियां नाबालिग हैं, जिन्हें स्कूल, ट्यूशन या रोज़मर्रा के काम के दौरान निशाना बनाया गया। पार्टी का कहना है कि जब अपराध के बाद भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती, आरोपी खुलेआम घूमते हैं और सरकारें चुप्पी साध लेती हैं, तो यह हालात को ‘जंगलराज’ में बदल देता है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अगर सत्ता में बैठी सरकारें महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पा रही हैं, तो उनके सुशासन और कानून-व्यवस्था के दावे आखिर किस काम के हैं।
बिहार
बिहार के पूर्णिया से सामने आई घटना का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यहां एक लड़की के साथ गैंगरेप किया गया। आरोप है कि लड़की को घर लौटते समय किडनैप किया गया और उसके बाद उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। कांग्रेस का कहना है कि बिहार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है और अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम ऐसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। पार्टी के मुताबिक यह घटना बताती है कि आम आदमी की बेटी आज कितनी असुरक्षित महसूस कर रही है।
राजस्थान
राजस्थान की घटना को लेकर कांग्रेस ने कहा कि यहां 12वीं कक्षा की एक छात्रा को स्कूल जाते समय अगवा किया गया और फिर चलती कार में गैंगरेप जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है। पार्टी का कहना है कि अगर स्कूल जाने वाली छात्राएं ही सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार के महिला सुरक्षा के दावे किस काम के हैं?
मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश के हरदा से आई खबर पर कांग्रेस ने कहा कि यहां एक आदिवासी महिला को काम देने के बहाने बुलाया गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। कांग्रेस का कहना है कि यह घटना समाज के सबसे कमजोर तबकों के शोषण को उजागर करती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि BJP सरकारें सिर्फ भाषणों में आदिवासियों और महिलाओं की बात करती हैं, लेकिन जब असल सुरक्षा देने की बारी आती है तो सिस्टम पूरी तरह नाकाम दिखता है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के बीड़ जिले में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर रेप की घटना को लेकर कांग्रेस ने कहा कि लड़की को ट्यूशन जाते समय किडनैप किया गया। पार्टी का कहना है कि नाबालिग बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं और अपराधी बेखौफ होकर ऐसी वारदातें कर रहे हैं। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
हरियाणा
हरियाणा के सिरसा की घटना को लेकर कांग्रेस ने बताया कि यहां दो नाबालिग बहनों के साथ रेप किया गया और इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि पूरे समाज को डराने वाली घटना है। पार्टी ने आरोप लगाया कि अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं है, क्योंकि उन्हें राजनीतिक संरक्षण या सिस्टम की ढील का भरोसा है।
ओडिशा
ओडिशा के रायगढ़ में सामने आई घटना का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि यहां 18 साल की एक लड़की के साथ रेप किया गया, जब वह लकड़ी इकट्ठा कर घर लौट रही थी। पार्टी का कहना है कि यह घटना बताती है कि रोजमर्रा के काम करने वाली लड़कियां भी सुरक्षित नहीं हैं। जंगल, सड़क या गांव—हर जगह डर का माहौल है।
गुजरात
गुजरात के नवसारी जिले में 15 साल की नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप की घटना को लेकर कांग्रेस ने कहा कि लड़की को रात के समय घर के बाहर से अगवा किया गया। पार्टी ने सवाल किया कि जिस राज्य को ‘मॉडल’ कहा जाता है, वहां नाबालिग बच्चियां भी सुरक्षित क्यों नहीं हैं?
असम
असम के पथारघाट से आई खबर का जिक्र करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यहां एक लड़की को बीच सड़क से अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि यह घटना दिखाती है कि अपराधियों को न पुलिस का डर है और न कानून का।
उत्तराखंड
उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गंभीर और चिंताजनक सामाजिक सच्चाई बनी हुई है। NCRB और उत्तराखंड पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि 2022 में महिलाओं के खिलाफ 4,337 मामले दर्ज किए गए, 2023 में 3,808 और 2024 में 3,342 मामले सामने आए, जिनमें बलात्कार, अपहरण, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और साइबर यौन अपराध जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। इन मामलों में सैकड़ों बलात्कार की घटनाएं, सैकड़ों अपहरण और महिलाओं के खिलाफ संगठित व योजनाबद्ध अपराधों की तस्वीर उभरती है, जो राज्य में महिलाओं की रोजमर्रा की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। इस भयावह स्थिति का सबसे चर्चित उदाहरण सितंबर 2022 का अंकिता भंडारी हत्याकांड है, जिसमें एक युवा लड़की के साथ कथित यौन हिंसा के बाद उसकी हत्या कर दी गई; यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सत्ता, प्रभाव और न्याय व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालों का प्रतीक बन गया। ऐसे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल आंकड़े नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और प्रशासनिक विफलता का संकेत हैं।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध एक गहरी और लगातार बनी रहने वाली सामाजिक-कानूनी चिंता है, जहाँ बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, अपहरण, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और हत्या जैसे अपराध बार-बार सामने आते रहे हैं। NCRB के आंकड़ों के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों में उत्तर प्रदेश लंबे समय से शीर्ष राज्यों में रहा है, जो इस बात का संकेत है कि आबादी के अनुपात से कहीं अधिक महिलाएं असुरक्षा का सामना कर रही हैं। कई मामलों में पीड़िताएं नाबालिग होती हैं और अपराध स्कूल, खेत, कार्यस्थल या घर के आसपास ही होते हैं, जिससे डर का दायरा और गहरा हो जाता है। हाथरस, उन्नाव, बदायूं, लखीमपुर खीरी और प्रयागराज जैसे मामलों ने राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस की संवेदनशीलता और राजनीतिक संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बार-बार दोहराए जाने वाले ऐसे अपराध यह दिखाते हैं कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल कानून का नहीं, बल्कि सत्ता की जवाबदेही और सामाजिक मानसिकता की भी बड़ी परीक्षा बनी हुई है।
कांग्रेस ने इन सभी घटनाओं को जोड़ते हुए कहा है कि यह BJP के ‘जंगलराज’ की घिनौनी सच्चाई है। पार्टी का आरोप है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला सुरक्षा को लेकर चाहे जितने भाषण दे लें, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद भयावह और शर्मनाक है। कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार सिर्फ नारेबाज़ी न करे, बल्कि कड़ी कार्रवाई, तेज़ न्याय और वास्तविक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि देश की बेटियां डर के साए में जीने को मजबूर न हों।




