अंतरराष्ट्रीय डेस्क 21 दिसंबर 2025
ब्रुसेल्स से बड़ी खबर है। यूरोपीय संघ (ईयू) ने रूस से जंग झेल रहे यूक्रेन की मदद के लिए अगले दो साल में 90 अरब यूरो (करीब 105 अरब डॉलर) का कर्ज देने पर सहमति बना ली है। यह पैसा यूक्रेन के बजट और रक्षा जरूरतों में काम आएगा। खास बात यह है कि यह रकम ईयू सीधे अपने खजाने से नहीं, बल्कि बाजार से बॉन्ड जारी कर उधार लेकर देगा।
दरअसल, ईयू पहले यूरोप में फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों (करीब 210 अरब यूरो) से मदद देना चाहता था। लेकिन बेल्जियम समेत कुछ देशों ने आपत्ति जताई। बेल्जियम में इन संपत्तियों का बड़ा हिस्सा रखा है और वहां के नेताओं को रूस की जवाबी कार्रवाई का डर था। लंबी बातचीत के बाद यह रास्ता फिलहाल बंद हो गया और ईयू ने बॉन्ड के जरिए फंड जुटाने का फैसला किया।
यूक्रेन के लिए यह कर्ज ब्याज-मुक्त होगा, लेकिन ईयू को हर साल करीब 3 अरब यूरो ब्याज चुकाना पड़ेगा। यह बोझ सदस्य देश अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था के हिसाब से उठाएंगे। जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन और पोलैंड पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा। राहत की बात यह है कि यह ईयू-स्तरीय कर्ज होगा, इसलिए किसी एक देश के राष्ट्रीय कर्ज में नहीं जुड़ता।
कर्ज की वापसी को लेकर भी शर्त रखी गई है—यूक्रेन तब लौटाएगा जब रूस युद्ध रोककर मुआवजा देगा। हालांकि मॉस्को ने मुआवजे से इनकार किया है। ऐसे में ईयू संकेत दे चुका है कि जरूरत पड़ी तो समयसीमा बढ़ाई जा सकती है या अंत में कर्ज माफ भी हो सकता है। रूसी संपत्तियां फिलहाल फ्रीज ही रहेंगी और भविष्य में कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हो सकती हैं।
इस योजना से हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य बाहर रहे हैं। इन देशों ने शुरू से यूक्रेन को बड़ी मदद का विरोध किया और ब्याज बोझ से छूट मांगी, जिसे ईयू ने मान लिया। चूंकि इन तीनों की संयुक्त अर्थव्यवस्था ईयू की कुल जीडीपी का सिर्फ 3.64% है, इसलिए बाकी 24 देश यह भार संभाल लेंगे।
एक और अहम शर्त है—“मेड इन यूरोप”। यानी मदद का बड़ा हिस्सा यूरोपीय रक्षा कंपनियों को मिलेगा। बाहर से हथियार तभी खरीदे जाएंगे, जब यूरोप में वे उपलब्ध न हों।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे देश की ताकत बढ़ेगी। वहीं रूस ने इसे “चोरी” बताया है। कुल मिलाकर, अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बीच जब मदद पर सवाल उठ रहे हैं, तब ईयू का यह कदम यूक्रेन के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है—भले ही रास्ता थोड़ा मुश्किल क्यों न हो।




