Home » Education / Employment » जुड़वां भाइयों का कमाल: JEE Main 2026 में मिले एक जैसे नंबर, मां ने पढ़ाई के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी

जुड़वां भाइयों का कमाल: JEE Main 2026 में मिले एक जैसे नंबर, मां ने पढ़ाई के लिए छोड़ी सरकारी नौकरी

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

एबीसी नेशनल न्यूज़ | भुवनेश्वर | 18 फरवरी 2026

देश की प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE Main 2026 के परिणाम जब घोषित हुए तो लाखों परीक्षार्थियों के बीच ओडिशा के भुवनेश्वर से आई एक खबर ने सबका ध्यान खींच लिया। जुड़वां भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान ने न केवल शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि दोनों के अंक बिल्कुल एक जैसे आए। इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में, जहां लाखों छात्र अलग-अलग केंद्रों पर बैठकर प्रश्न हल करते हैं, वहां दो सगे भाइयों का समान स्कोर पाना किसी संयोग से ज्यादा मेहनत और तालमेल की कहानी बयान करता है।

महरूफ और मसरूर की तैयारी महज किताबों तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह एक साझा सफर था। राजस्थान के कोटा में किराए के छोटे से कमरे में दोनों ने अपनी दुनिया बसाई, जहां सुबह की शुरुआत रिवीजन से होती और रात का अंत मॉक टेस्ट के विश्लेषण पर। अगर एक भाई किसी प्रश्न में उलझता, तो दूसरा उसके साथ बैठकर तब तक चर्चा करता जब तक समाधान स्पष्ट न हो जाए। दोनों ने कभी एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं माना, बल्कि सहयात्री समझा। उनका मानना है कि जब लक्ष्य साझा हो, तो प्रतिस्पर्धा की जगह सहयोग ले लेता है — और यही सोच उनकी सफलता की बुनियाद बनी।

इस उपलब्धि के पीछे सबसे बड़ी शक्ति उनकी मां का त्याग है। बच्चों के सपनों को पंख देने के लिए उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और कोटा में रहकर दोनों बेटों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा संभाला। घर की व्यवस्था से लेकर मानसिक हौसला बढ़ाने तक, हर मोर्चे पर वे ढाल बनकर खड़ी रहीं। परीक्षा के तनाव भरे दिनों में जब आत्मविश्वास डगमगाता, तो मां का भरोसा उन्हें संभाल लेता। महरूफ और मसरूर कहते हैं कि उनके समान अंक केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि मां के विश्वास और बलिदान का प्रतिफल हैं।

अब दोनों भाई अगली चुनौती के लिए तैयार हैं। वे पूरी ऊर्जा के साथ JEE Advanced की तैयारी में जुट गए हैं। उनका सपना है कि वे देश के प्रतिष्ठित IIT संस्थानों में प्रवेश लेकर कंप्यूटर साइंस जैसे अग्रणी क्षेत्र में आगे बढ़ें और तकनीक के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।

यह कहानी सिर्फ दो भाइयों के समान अंकों की नहीं, बल्कि उस परिवार की है जिसने सपनों को प्राथमिकता दी, त्याग को स्वीकार किया और सहयोग को ताकत बनाया। लाखों छात्रों के बीच यह उदाहरण याद दिलाता है कि जब घर का विश्वास, भाईचारे का साथ और लक्ष्य की स्पष्टता एक साथ मिल जाए, तो सफलता भी दोहरी हो जाती है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments