महेंद्र कुमार । नई दिल्ली 16 दिसंबर 2025
नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत को दिल्ली की अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद सियासी तापमान तेज़ हो गया है। कांग्रेस ने इसे “सच की जीत और झूठ की करारी हार” बताते हुए BJP-RSS और मोदी सरकार पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के दुरुपयोग का सीधा आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि वर्षों से चल रही यह पूरी कवायद किसी अपराध की जांच नहीं, बल्कि विपक्ष को डराने, बदनाम करने और लोकतांत्रिक आवाज़ों को कुचलने की साजिश थी—जिसे अब अदालत ने भी नकार दिया है। कांग्रेस ने कहा कि BJP ने पूरी ताकत लगा दी, सारा सिस्टम झोंक दिया.. लेकिन अंत में मुंह की खानी पड़ी।
‘नेशनल हेराल्ड’ का फर्जी मामला याद दिलाता रहेगा कि झूठ कितना भी जोर लगा ले- जीत हमेशा सच की होती है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने फैसले के बाद तीखा बयान देते हुए कहा कि जब नेशनल हेराल्ड, कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए, तब भी पार्टी डरी नहीं। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस अंग्रेज़ों से नहीं डरी, तो BJP-RSS या मोदी-शाह से क्या डरेगी। खड़गे के अनुसार, अदालत ने आज मोदी सरकार की कार्रवाई को अवैध ठहराते हुए राजनीतिक बदले की नीयत से रची गई इस साजिश को नाकाम कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “वोट चोर सरकार” जितनी भी ज़ोर-जबरदस्ती कर ले, कांग्रेस 140 करोड़ भारतीयों और संविधान की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी—और सच की जीत तय है।
कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक प्रतिक्रिया में दोहराया कि नेशनल हेराल्ड केस में “कुछ भी नहीं है”—यह तथ्य अब न्यायपालिका के सामने भी स्थापित हो चुका है। पार्टी का कहना है कि सरकार इस केस को घसीटती रही क्योंकि न तो कंपनी से कोई पैसा निकाला जा सकता था, न कोई संपत्ति बेची जा सकती थी, न ही निजी लाभ का कोई प्रमाण था। इसके बावजूद वर्षों तक जांच, समन और प्रचार के ज़रिये विपक्ष को बदनाम किया गया। कांग्रेस के मुताबिक, यह सच्चाई सबको मालूम थी, लेकिन अंततः वही सच सार्वजनिक रूप से सामने आ गया।
लोकसभा में कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस पूरे प्रकरण को लोकतंत्र के खिलाफ सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 साल से टीवी डिबेट्स और सुर्खियों के ज़रिये जनता का ध्यान ज़रूरी मुद्दों—महंगाई, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा, किसानों की बदहाली—से हटाकर नेशनल हेराल्ड जैसे मामलों पर ले जाया जाता रहा। जब भी असली सवाल उठते हैं, विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए कोई न कोई साज़िश रची जाती है। प्रियंका गांधी के अनुसार, अदालत का फैसला इस बात का प्रमाण है कि सरकार का नैरेटिव खोखला था।
AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि आज शायद ED के अधिकारी भी राहत की सांस ले रहे होंगे, क्योंकि उन पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की ओर से जो दबाव बनाया जा रहा था, वह खत्म हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने लोकतंत्र को मज़ाक बनाकर रख दिया है—जहां जांच एजेंसियां राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल की जाती हैं और अदालतों में जाकर वही आरोप ढह जाते हैं।
कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि उस राजनीति पर सवाल है जो जांच एजेंसियों के सहारे विपक्ष को डराने की कोशिश करती है। पार्टी ने इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया है। कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, नेशनल हेराल्ड हो या महात्मा गांधी का नाम—ये सभी उस लंबे संघर्ष की स्मृति-चिन्ह हैं, जिसने देश को आज़ादी दिलाई। उन्हें मिटाने या बदनाम करने की हर कोशिश अंततः असफल होगी। कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि झूठ चाहे जितना शोर मचाए, अंत में जीत सच की ही होती है।




