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ट्रंप की धमकी बेअसर: रूस से तेल खरीदेगा भारत, अमेरिका को दो टूक जवाब!

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नई दिल्ली, 3 अगस्त 2025

भारत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा ज़रूरतों और राष्ट्रीय हितों के मद्देनज़र किसी बाहरी दबाव में नहीं आएगा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत को धमकी देने के बावजूद, भारत सरकार ने दो टूक कह दिया है कि वह रूस से तेल आयात जारी रखेगा। यह संदेश अब वॉशिंगटन तक स्पष्ट रूप से पहुंच चुका है।

ट्रंप ने हाल ही में एक साक्षात्कार में भारत को चेतावनी दी थी कि यदि वह रूस से सस्ते तेल का आयात जारी रखता है, तो अमेरिका इसके परिणाम भुगतने को मजबूर कर देगा। हालांकि, भारत ने इन धमकियों को नज़रअंदाज़ करते हुए साफ संकेत दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा उसका सर्वोच्च प्राथमिकता है, और वह अपने फैसले में संप्रभु है।

सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिका को कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से यह भी समझाया है कि रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में है और इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता बनी रहती है। भारत का यह रुख दुनिया भर में उसकी स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक संतुलन की मिसाल बन रहा है।

2022 से ही, जब पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए, भारत ने अपनी कूटनीति और राष्ट्रीय हितों के संतुलन को साधते हुए रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदना शुरू किया। इससे एक ओर देश की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है, तो दूसरी ओर आम भारतीय उपभोक्ता को भी महंगाई से राहत मिली है।

अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी इस मसले को लेकर मतभेद देखे जा रहे हैं। जहां ट्रंप जैसे नेता भारत पर दबाव बनाने की वकालत कर रहे हैं, वहीं बाइडन प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा भारत के साथ रिश्तों को प्राथमिकता देता है और जानता है कि भारत जैसा बड़ा लोकतंत्र अमेरिका के दीर्घकालिक साझेदारों में से एक है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह स्थिति न केवल उसकी वैश्विक स्थिति को सुदृढ़ करती है, बल्कि उसे रणनीतिक रूप से और भी आत्मनिर्भर और निर्णायक देश के रूप में प्रस्तुत करती है।

इस घटनाक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि 21वीं सदी का भारत न तो किसी की धमकी से डरता है, न ही किसी के दबाव में झुकता है। वह अपने हितों की रक्षा करना जानता है, चाहे मामला ऊर्जा का हो, कूटनीति का या रणनीति का।

भारत का यह निर्णय दर्शाता है कि वह अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ के नारे को केवल नारा नहीं, बल्कि रणनीतिक हकीकत में बदल चुका है। अमेरिका को भी अब यह समझ लेना होगा कि भारत वैश्विक राजनीति में अब किसी की कठपुतली नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और प्रभावशाली शक्ति है।

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