एबीसी नेशनल न्यूज | वॉशिंगटन | 25 फरवरी 2026
स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में बड़ा संकेत
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन के दौरान कहा कि उनकी सरकार ने बड़ी टेक कंपनियों को स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अपने डेटा सेंटर चलाने के लिए खुद बिजली उत्पादन की व्यवस्था करनी होगी। ट्रंप ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं पर बढ़ते बिजली बिल के दबाव को कम करना और ऊर्जा मांग के असंतुलन को नियंत्रित करना है।
डेटा सेंटर की बढ़ती ऊर्जा खपत बनी चिंता
सरकार का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के कारण डेटा सेंटर की बिजली खपत लगातार बढ़ रही है। इससे स्थानीय ग्रिड पर दबाव पड़ता है और कई इलाकों में बिजली दरों में वृद्धि देखने को मिलती है। प्रशासन का तर्क है कि यदि कंपनियां अपने पावर प्लांट स्थापित करती हैं तो सार्वजनिक बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए लागत नियंत्रित रह सकेगी।
टेक कंपनियों पर निवेश का दबाव बढ़ेगा
इस प्रस्ताव के लागू होने पर बड़ी तकनीकी कंपनियों को ऊर्जा अवसंरचना में अतिरिक्त निवेश करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र, गैस आधारित पावर प्लांट या छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर विकल्पों पर विचार कर सकती हैं। हालांकि इससे कंपनियों की लागत बढ़ने की संभावना है, लेकिन लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा और संचालन की स्थिरता बेहतर हो सकती है।
उद्योग और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन की कोशिश
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऊर्जा जरूरतों का संतुलन बनाना जरूरी हो गया है। सरकार इसे उपभोक्ताओं को बढ़ते बिजली बिल से बचाने और ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बता रही है। वहीं उद्योग जगत के कुछ प्रतिनिधियों का मानना है कि नई शर्तों से परियोजनाओं की लागत और समयसीमा प्रभावित हो सकती है, इसलिए नीतिगत स्पष्टता और प्रोत्साहन जरूरी होंगे।
आने वाले समय में नीति पर नजर
विश्लेषकों के अनुसार यह पहल तकनीकी क्षेत्र और ऊर्जा नीति के बीच नए समीकरण पैदा कर सकती है। यदि कंपनियां बड़े पैमाने पर निजी बिजली उत्पादन की ओर बढ़ती हैं तो इससे ऊर्जा बाजार, पर्यावरणीय नीतियों और निवेश पैटर्न पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल ट्रंप के इस बयान के बाद टेक उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र दोनों की नजर सरकार की अगली नीतिगत दिशा पर टिकी हुई है।




