एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 16 मार्च 2026
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो (NATO) के सदस्य देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने और उसे जहाजों के लिए खुला रखने में मदद मांगी है। ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि जिस तरह अमेरिका ने यूक्रेन संकट के दौरान अपने सहयोगियों की मदद की थी, उसी तरह अब उन्हें भी ईरान से जुड़े मौजूदा संकट में अमेरिका का साथ देना चाहिए।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत और एक अंतरराष्ट्रीय अखबार को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि अगर नाटो के देश इस मिशन में अमेरिका का साथ नहीं देते हैं, तो यह गठबंधन के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से लाभ मिलता है, उन्हें अब इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी साझा करनी चाहिए।
दरअसल यह अपील ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान का सैन्य संघर्ष तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है। इस युद्ध के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है। ईरान का दावा है कि उसने इस मार्ग को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए परिस्थितियां बेहद कठिन बना दी गई हैं। यही कारण है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। मौजूदा संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने लगा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कई देशों के नेताओं से बातचीत की है। कुछ देशों ने सहयोग का संकेत दिया है, लेकिन यूरोप के कई प्रमुख नाटो सदस्य देशों ने अभी तक युद्धपोत भेजने को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं दी है। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने इस मामले में सतर्क रुख अपनाया है और सीधे सैन्य हस्तक्षेप से बचने की कोशिश की है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि उनका देश अपने सहयोगियों के साथ स्थिति पर चर्चा कर रहा है और संभावित रणनीति पर विचार कर रहा है, लेकिन फिलहाल इसे नाटो का औपचारिक मिशन नहीं माना जा सकता। वहीं जर्मनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा संघर्ष को नाटो का युद्ध नहीं माना जा सकता और यूरोपीय देशों को इसमें सावधानी से कदम उठाने होंगे।
उधर ईरान ने ट्रंप की इस अपील पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है। ईरान के कुछ अधिकारियों और सोशल मीडिया पर सामने आई प्रतिक्रियाओं में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका को अब अपने सहयोगियों से खुलकर समर्थन नहीं मिल पा रहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह उनकी “ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी” का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका अपने सहयोगियों से पारस्परिक सहयोग की अपेक्षा कर रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी यह संकट अब वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण बन गया है। अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर जल्द कोई अंतरराष्ट्रीय समाधान नहीं निकला तो युद्ध का दायरा और भी व्यापक हो सकता है।




