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वेनेज़ुएला के तेल पर ट्रंप की नज़र: $100 अरब निवेश चाहते हैं, लेकिन Exxon प्रमुख बोले—देश ‘निवेश के लायक नहीं’

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 10 जनवरी 2026

वॉशिंगटन / काराकास। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वेनेज़ुएला के विशाल तेल भंडार को लेकर बड़ा दांव खेला है। ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों से अपील की है कि वे वेनेज़ुएला के तेल क्षेत्र में कम से कम 100 अरब डॉलर (करीब 8 लाख करोड़ रुपये) का निवेश करें, ताकि वहां का तेल उत्पादन बढ़ाया जा सके और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार, खासकर अमेरिका में ईंधन की कीमतों को काबू में रखा जा सके। लेकिन ट्रंप की इस महत्वाकांक्षी योजना को तेल उद्योग से तुरंत झटका लगा है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में शामिल ExxonMobil के प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा है कि मौजूदा हालात में वेनेज़ुएला “अनइनवेस्टेबल” यानी निवेश के लायक ही नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अमेरिकी तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि वेनेज़ुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं और अगर वहां बड़े पैमाने पर निवेश किया जाए तो तेल उत्पादन को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचाया जा सकता है। ट्रंप का दावा है कि इससे न सिर्फ वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी, बल्कि अमेरिका में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों पर भी दबाव कम होगा। ट्रंप ने कंपनियों को यह भरोसा भी दिलाया कि निवेश करने वालों को “पूरी सुरक्षा” दी जाएगी और वेनेज़ुएला में उनके हितों की रक्षा की जाएगी।

हालांकि, ट्रंप की इस अपील पर तेल कंपनियों की प्रतिक्रिया ठंडी रही। सबसे कड़ा बयान ExxonMobil के CEO डैरेन वुड्स की ओर से आया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वेनेज़ुएला का मौजूदा राजनीतिक और कानूनी माहौल निवेश के लिए सुरक्षित नहीं है। वुड्स ने याद दिलाया कि Exxon के वेनेज़ुएला में मौजूद तेल प्रोजेक्ट्स को अतीत में दो बार जब्त (राष्ट्रीयकृत) किया जा चुका है, जिससे कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उनके मुताबिक, जब तक वहां मजबूत कानून, संपत्ति की सुरक्षा और स्थिर सरकार की गारंटी नहीं मिलती, तब तक अरबों डॉलर का निवेश करना व्यावहारिक नहीं है।

तेल उद्योग के अन्य जानकारों का भी मानना है कि वेनेज़ुएला में निवेश को लेकर जोखिम बहुत ज़्यादा हैं। देश लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, भ्रष्टाचार और जर्जर बुनियादी ढांचे से जूझ रहा है। तेल रिफाइनरियां और पाइपलाइन सिस्टम बदहाल हैं और कुशल तकनीकी स्टाफ की भी भारी कमी है। इन सब वजहों से विदेशी कंपनियां बड़े निवेश से बचती रही हैं।

हालांकि कुछ कंपनियों ने सीमित रुचि दिखाई है। उदाहरण के तौर पर Chevron जैसी कंपनी पहले से वेनेज़ुएला में सीमित स्तर पर काम कर रही है और उसने यह संकेत दिया है कि अगर हालात सुधरते हैं तो उत्पादन थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। लेकिन ट्रंप द्वारा सुझाए गए 100 अरब डॉलर के विशाल निवेश को लेकर फिलहाल कोई बड़ी अमेरिकी कंपनी खुलकर आगे आती नहीं दिख रही।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप की यह पहल आर्थिक से ज़्यादा राजनीतिक संदेश भी हो सकती है। एक तरफ वह वेनेज़ुएला के तेल का इस्तेमाल वैश्विक ऊर्जा संकट और महंगाई से जोड़कर दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां बीते अनुभवों को देखते हुए बेहद सतर्क हैं। जब तक वेनेज़ुएला में निवेशकों का भरोसा लौटाने वाले ठोस सुधार नहीं होते, तब तक ट्रंप का यह सपना ज़मीन पर उतरना मुश्किल माना जा रहा है।

वेनेज़ुएला के तेल भंडार दुनिया में सबसे बड़े हैं, लेकिन राजनीतिक जोखिम और कानूनी अनिश्चितता ने उन्हें विदेशी निवेश के लिए लगभग बंद कर दिया है। ट्रंप भले ही 100 अरब डॉलर का निवेश चाहते हों, लेकिन Exxon जैसी दिग्गज कंपनी का यह कहना कि देश “निवेश के लायक नहीं” है, इस पूरी योजना पर बड़ा सवालिया निशान लगा देता है।

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