एबीसी नेशनल न्यूज | वॉशिंगटन | 15 मार्च 2026
अमेरिका में मीडिया और सरकार के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। ईरान युद्ध को लेकर चल रही रिपोर्टिंग के बीच ट्रंप प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संकेत दिया है कि अगर कोई टीवी चैनल या प्रसारण संस्थान भ्रामक या झूठी खबरें प्रसारित करता है तो उसके प्रसारण लाइसेंस पर कार्रवाई हो सकती है। फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) के चेयरमैन ब्रेंडन कैर ने सोशल मीडिया पर सख्त संदेश जारी करते हुए कहा कि जो ब्रॉडकास्टर्स “फेक न्यूज” या “न्यूज़ डिस्टॉर्शन” फैलाते पाए जाएंगे, उन्हें लाइसेंस नवीनीकरण के समय गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
ब्रेंडन कैर ने कहा कि अमेरिकी कानून के तहत हर प्रसारण संस्था को “पब्लिक इंटरेस्ट” यानी जनता के हित में काम करना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई मीडिया संस्थान जानबूझकर खबरों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है या गलत जानकारी फैलाता है तो वह अपने लाइसेंस के अधिकार को खो सकता है। कैर के अनुसार मीडिया संस्थानों के पास अभी भी अपनी कार्यप्रणाली सुधारने का अवसर है, क्योंकि लाइसेंस के नवीनीकरण के समय यह देखा जाता है कि संस्थान ने सार्वजनिक हित के मानकों का पालन किया या नहीं।
यह विवाद उस समय तेज हुआ जब कुछ अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने ईरान युद्ध से संबंधित ऐसी खबरें प्रकाशित कीं, जिन पर ट्रंप प्रशासन ने कड़ी आपत्ति जताई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कई मीडिया संस्थानों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कुछ अखबार और चैनल जानबूझकर भ्रामक सुर्खियां चला रहे हैं। ट्रंप ने विशेष रूप से न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल का नाम लेते हुए कहा कि इन संस्थानों की रिपोर्टिंग वास्तविक तथ्यों से बिल्कुल उलट है।
ट्रंप ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थान ऐसी तस्वीर पेश कर रहे हैं जिससे यह लगता है कि अमेरिका युद्ध में कमजोर पड़ रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उनके अनुसार इस तरह की रिपोर्टिंग न केवल देश के मनोबल को प्रभावित करती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है। ट्रंप ने ऐसे मीडिया संस्थानों को कठोर शब्दों में निशाना बनाते हुए कहा कि वे देश के हितों को समझने में असफल रहे हैं।
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी मीडिया कवरेज की आलोचना करते हुए कहा कि कई चैनल और अखबार जानबूझकर ऐसे हेडलाइन बनाते हैं जो युद्ध की स्थिति को गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि टीवी स्क्रीन पर दिखाई जाने वाली सुर्खियां और दृश्य आम लोगों की सोच को प्रभावित करते हैं, इसलिए मीडिया को खबरों की प्रस्तुति में अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए।
गौरतलब है कि FCC अमेरिका में रेडियो, टेलीविजन, सैटेलाइट और वायरलेस संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम यानी एयरवेव्स के आवंटन को नियंत्रित करता है। यह स्पेक्ट्रम सार्वजनिक संपत्ति माना जाता है और सरकार प्रसारण संस्थानों को इसका उपयोग करने की अनुमति देती है। ऐसे में अगर कोई संस्था नियमों का उल्लंघन करती है तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
ब्रेंडन कैर ने यह भी कहा कि पारंपरिक मीडिया पर जनता का भरोसा लगातार घट रहा है। उनके मुताबिक सर्वेक्षणों में पाया गया है कि अब केवल लगभग 9 प्रतिशत लोग ही मुख्यधारा के मीडिया पर पूरा भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मीडिया अपनी विश्वसनीयता वापस पाना चाहता है तो उसे पारदर्शी और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पर ध्यान देना होगा।
ईरान युद्ध के कारण पहले से ही वैश्विक राजनीति में तनाव बना हुआ है और ऐसे समय में अमेरिका में सरकार और मीडिया के बीच बढ़ता टकराव एक नई बहस को जन्म दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज हो सकता है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन मीडिया की भूमिका पर लगातार सवाल उठा रहा है जबकि कई मीडिया संस्थान इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।




