एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली | 14 फरवरी 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “18% टैरिफ बनाम 0% टैरिफ” की वास्तविकता को देश के सामने सही तरीके से नहीं रखा गया और इस मुद्दे पर भ्रम फैलाया जा रहा है। राहुल गांधी का दावा है कि इस समझौते से भारत के कपास किसानों और टेक्सटाइल निर्यातकों दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।
राहुल गांधी ने कहा कि बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का लाभ दिया जा रहा है, जिसकी शर्त यह है कि वह अमेरिकी कपास का आयात करे। इसके विपरीत, भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ लागू रहने की घोषणा की गई है। उन्होंने संसद में यह मुद्दा उठाते हुए पूछा कि जब बांग्लादेश को यह विशेष रियायत मिल रही है, तो भारत के लिए समान शर्तों पर क्या व्यवस्था है। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार की ओर से जवाब मिला कि यदि भारत को भी ऐसी सुविधा चाहिए तो उसे अमेरिका से कपास आयात करना होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह शर्त पहले से समझौते का हिस्सा थी तो देश को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई। राहुल गांधी ने इसे “आगे कुआं, पीछे खाई” जैसी स्थिति बताया, जहां दोनों विकल्प देश के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। उनका कहना है कि यदि भारत अमेरिकी कपास आयात करता है तो देश के अपने कपास किसान प्रभावित होंगे, जबकि यदि ऐसा नहीं करता तो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वह भारत से कपास आयात कम या बंद कर सकता है, जिससे भारतीय कपास उत्पादकों के लिए अतिरिक्त संकट पैदा हो सकता है। उनके अनुसार, भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन पर निर्भर है। ऐसे में किसी भी असंतुलित व्यापार नीति का अर्थ होगा लाखों परिवारों को आर्थिक संकट और बेरोज़गारी की स्थिति में धकेल देना।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और उनकी कैबिनेट पर आरोप लगाया कि यह समझौता दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है। राहुल गांधी ने कहा कि एक राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा संतुलित समझौता करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल निर्यातकों दोनों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करता, लेकिन वर्तमान नीति दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाली प्रतीत होती है।
वहीं सरकार की ओर से अभी तक यह कहा गया है कि किसी भी व्यापार समझौते में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और सभी संबंधित क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। हालांकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार से पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा और अधिक गरमाने की संभावना है।




