अवधेश कुमार | 16 जनवरी 2026
भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व मिलने जा रहा है। यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति एंतोनियो लुईस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। दोनों शीर्ष यूरोपीय नेता 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित भव्य परेड और अन्य कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे।
भारत द्वारा यूरोपीय संघ के दो प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारियों को एक साथ आमंत्रित किया जाना, भारत-यूरोपीय संघ संबंधों की गहराई और मजबूती को दर्शाता है। यह निमंत्रण ऐसे समय में दिया गया है, जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार, तकनीक, रक्षा, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक कूटनीति जैसे मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार, गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग—दोनों के राष्ट्रपतियों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि भारत, यूरोपीय संघ को एक रणनीतिक साझेदार के रूप में कितनी अहमियत देता है। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और बहुपक्षीय कूटनीति में उसकी सक्रियता को भी रेखांकित करता है।
77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। इस अवसर पर यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति न केवल भारत के लिए गौरव की बात है, बल्कि आने वाले समय में भारत-EU संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का भी मजबूत संकेत मानी जा रही है।




