अपराध | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 21 मार्च 2026
देश में तेजी से बढ़ रहे “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर ठगी के मामलों ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है, और अब इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने WhatsApp सहित कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ बैठक कर यह साफ कर दिया है कि अब ठगी में इस्तेमाल होने वाली डिवाइस ID को सीधे ब्लॉक किया जाएगा, ताकि अपराधी बार-बार नया नंबर या अकाउंट बनाकर लोगों को निशाना न बना सकें। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक ठग एक नंबर बंद होने के बाद आसानी से दूसरा नंबर लेकर फिर से सक्रिय हो जाते थे, लेकिन डिवाइस स्तर पर कार्रवाई होने से उनका पूरा नेटवर्क प्रभावित होगा और उनकी गतिविधियों पर रोक लगेगी।
डिजिटल अरेस्ट दरअसल साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक तरीका बनकर सामने आया है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं और सामने वाले व्यक्ति को डराकर कहते हैं कि वह किसी बड़े केस में फंसा हुआ है। इसके बाद उसे “डिजिटल गिरफ्तारी” में होने का झांसा देकर घंटों फोन या वीडियो कॉल पर रखा जाता है और मानसिक दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि लोग डर और शर्म के कारण किसी से सलाह भी नहीं लेते और ठगी का शिकार हो जाते हैं। यही वजह है कि सरकार इस तरह के अपराध को बेहद गंभीर मानते हुए टेक्नोलॉजी के स्तर पर ही इसे रोकने की कोशिश कर रही है।
इस दिशा में WhatsApp में कई नए सुरक्षा फीचर लाने की तैयारी की जा रही है, जिससे यूजर्स को पहले ही चेतावनी मिल सके। आने वाले समय में अगर कोई संदिग्ध कॉल आती है तो WhatsApp उस पर वार्निंग दिखा सकता है, जिससे यूजर सतर्क हो जाए। इसके अलावा वीडियो कॉल करने वाले की पहचान से जुड़ी ज्यादा जानकारी भी स्क्रीन पर दिखाई जा सकती है, ताकि यूजर समझ सके कि सामने वाला व्यक्ति असली है या फर्जी। इतना ही नहीं, ठगी में इस्तेमाल होने वाले नकली ऐप्स और खतरनाक फाइल्स को भी सिस्टम खुद पहचानकर ब्लॉक कर सकेगा, जिससे लोगों के फोन में मालवेयर या जासूसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल होने का खतरा कम होगा।
सरकार की चिंता इस बात से भी साफ होती है कि पिछले एक साल में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और हजारों लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में ही लाखों की संख्या में शिकायतें सामने आईं और लोगों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यही कारण है कि अब केवल अकाउंट ब्लॉक करने से काम नहीं चल रहा था, बल्कि पूरे डिवाइस को ब्लॉक करने जैसा सख्त कदम जरूरी हो गया था। इससे न सिर्फ अपराधियों की पहचान आसान होगी बल्कि उनके लिए दोबारा ठगी करना भी मुश्किल हो जाएगा।
सरकारी एजेंसियां पहले भी इस दिशा में कार्रवाई करती रही हैं और हजारों WhatsApp अकाउंट, मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल ID को बंद किया जा चुका है, लेकिन अब रणनीति को और मजबूत किया जा रहा है। टेक कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिसमें रियल टाइम निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और तुरंत कार्रवाई जैसे कदम शामिल होंगे। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
आसान भाषा में समझें तो अब ठगों के लिए लोगों को डराकर पैसे ऐंठना पहले जैसा आसान नहीं रहेगा। अगर वे बार-बार नया नंबर बनाकर लोगों को कॉल करेंगे, तो उनका पूरा फोन सिस्टम ही ब्लॉक हो सकता है। वहीं आम आदमी के लिए WhatsApp एक तरह का सुरक्षा कवच बनकर काम करेगा, जो पहले ही चेतावनी देकर उसे सावधान कर देगा। सरकार और टेक कंपनियों की यह संयुक्त पहल डिजिटल दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।




