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हार के बाद तीन चालें? ‘मैनेज्ड लोकतंत्र’ पर योगेन्द्र यादव का तीखा प्रहार

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एबीसी डेस्क 15 दिसंबर 2025

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को दिए एक इंटरव्यू में केंद्र की मोदी सरकार और BJP की राजनीतिक रणनीतियों पर तीखा और व्यंग्यात्मक हमला किया है। लोकसभा चुनावों में मिले झटके के बाद सरकार किस रास्ते पर आगे बढ़ सकती है, इसे लेकर योगेन्द्र यादव ने तीन ऐसे “समाधानों” की बात की, जिन्हें उन्होंने लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक बताया। उनका कहना था कि ये समाधान जनता की राय बदलने के नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही इस तरह ढालने के तरीके हैं कि सत्ता में बने रहना सुनिश्चित किया जा सके।

योगेन्द्र यादव के मुताबिक पहला रास्ता डिलिमिटेशन (सीमांकन) का है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में BJP को लगातार वोट नहीं मिलते, वहां सीटों की संख्या घटाने या उनका राजनीतिक वजन कम करने की योजना बनाई जा सकती है। इसका सीधा असर उन राज्यों और क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां सरकार के खिलाफ जनमत मजबूत है। यादव के अनुसार यह प्रतिनिधित्व की भावना के खिलाफ है, क्योंकि लोकतंत्र में सीटें जनता की संख्या और जरूरतों के हिसाब से तय होती हैं, न कि सत्ता के फायदे-नुकसान को देखकर।

दूसरा रास्ता बताते हुए योगेन्द्र यादव ने वन नेशन–वन इलेक्शन की अवधारणा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि इसे बार-बार “खर्च बचाने” और “स्थिरता” के नाम पर पेश किया जा रहा है, लेकिन असल मकसद चुनावी प्रक्रिया को एक साथ “मैनेज” करना है। यादव के अनुसार अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव जनता को सरकार के कामकाज पर बार-बार फैसला सुनाने का मौका देते हैं, जबकि एक साथ चुनाव कराने से सत्ता को लंबे समय तक बिना जवाबदेही के चलने की छूट मिल जाती है।

तीसरे और सबसे गंभीर खतरे के तौर पर योगेन्द्र यादव ने SIR (स्पेशल आइडेंटिफिकेशन रजिस्टर) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन नागरिकों से सत्ता असहज महसूस करती है, जो सवाल पूछते हैं या असहमति जताते हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाने या उन्हें “संदिग्ध” बनाने का रास्ता अपनाया जा सकता है। यादव ने इसे नागरिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया और कहा कि यह लोकतंत्र को भीतर से खोखला करने की प्रक्रिया है, जहां चुनाव तो होंगे, लेकिन चुनने वालों को ही छांट दिया जाएगा।

पूरे इंटरव्यू में योगेन्द्र यादव का लहजा गंभीर होने के साथ-साथ तीखे व्यंग्य से भरा रहा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “लोकतंत्र रहेगा, चुनाव भी होंगे—और BJP की जीत भी पक्की रहेगी!” इस बयान के जरिए उन्होंने यह संकेत दिया कि अगर नियम, सीमाएं और मतदाता ही सत्ता के हिसाब से तय किए जाएंगे, तो चुनावी नतीजे पहले से लिखे हुए होंगे। यादव का कहना था कि असली लड़ाई सरकार बनाम विपक्ष की नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने बनाम उसे औपचारिक ढांचे तक सीमित कर देने की है।

योगेन्द्र यादव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची, सीमांकन और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर देशभर में बहस तेज है। उनके अनुसार अगर इन मुद्दों पर समय रहते सवाल नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में भारत में चुनाव तो होंगे, लेकिन जनता की असली भागीदारी और विकल्प धीरे-धीरे सिमटते चले जाएंगे।

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