अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 12 नवंबर 2025
सऊदी अरब में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित WTA फ़ाइनल्स ने महिला टेनिस को नई चमक और दुनिया की सबसे बड़ी प्राइज मनी का रिकॉर्ड तो दिया, लेकिन इसके साथ ही एक गहरी बहस भी शुरू कर दी है—क्या यह आयोजन वास्तव में सऊदी अरब में महिलाओं की स्थिति को बदल रहा है, या यह सिर्फ “स्पोर्ट्सवॉशिंग” का एक भव्य प्रयत्न है? एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर की चमक, करोड़ों डॉलर की पुरस्कार राशि, और कोको गॉफ़ जैसी दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी ने रियाद को ग्लोबल स्पोर्ट्स मैप पर मजबूती दी; दूसरी तरफ, मानवाधिकार संगठनों ने इसे उन महिलाओं की आवाज़ दबाने का तरीका बताया जिन्हें अब भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दो बार की ग्रैंड स्लैम विजेता और टूर्नामेंट डायरेक्टर गार्बिन मुगुरूज़ा के अनुसार, इस साल दर्शकों में उत्साह बढ़ा है। वह कहती हैं कि स्थानीय लोग अब टेनिस से ज्यादा परिचित हो रहे हैं, खासतौर पर महिलाएँ और लड़कियाँ। मुगुरूज़ा के मुताबिक, सऊदी अरब का समाज खेल—विशेषकर महिला खेल—को अपनाने के लिए बदल रहा है और WTA फ़ाइनल्स इस बदलाव का हिस्सा हैं। लेकिन यह आधा सच है—या कम से कम, सिर्फ चमकदार सतह। इसके उलट, एमनेस्टी इंटरनेशनल की बिसान फ़कीह स्पष्ट रूप से कहती हैं कि खेल आयोजन के नाम पर महिलाओं के गहरे मानवीय संघर्षों को छिपाया नहीं जा सकता। वह बताती हैं कि सऊदी अरब में मनोरंजन और खेलों में निवेश बढ़ा है, लेकिन परिवार, विवाह, तलाक और बच्चों की कस्टडी जैसे महत्वपूर्ण मामलों में अभी भी गहरी लैंगिक असमानताएँ कायम हैं।
मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच भी इस आयोजन को लेकर बेहद आलोचनात्मक है। उनका कहना है कि WTA की मौजूदगी ने महिलाओं के अधिकारों में कोई ठोस सुधार नहीं लाया है। वे मनाहल अल-उतेबी जैसे मामलों का हवाला देते हैं, जो महिलाओं के अधिकारों पर ट्वीट करने के लिए 5 साल की कैद काट रही हैं। उनकी बहन फावज़िया अल-उतेबी ने BBC से कहा कि सऊदी अधिकारी एक तरफ दुनिया को महिलाओं को सशक्त बनाने का दिखावा कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ महिलाओं और कार्यकर्ताओं को जेल में डाल रहे हैं। यह विरोधाभास सऊदी अरब की वास्तविक तस्वीर को उजागर करता है—एक ऐसा देश जो खेल के जरिए अपनी प्रतिष्ठा सुधारना चाहता है, जबकि मानवाधिकारों पर उसकी नीति आलोचनाओं से घिरी है।
दूसरे पहलू पर जाएँ तो सऊदी टेनिस फेडरेशन के आंकड़े एक अलग कहानी सुनाते हैं। उनके अनुसार, 2024 के बाद से महिलाओं की टेनिस भागीदारी 24% बढ़कर 17,000 तक पहुँच गई है, और देश में कुल 330,000 से ज्यादा महिला खिलाड़ी रजिस्टर हैं। महिला खेलों में कुल भागीदारी 2017 के 14% से बढ़कर 2025 में 59% हो चुकी है—ये आँकड़े किसी भी देश के लिए उल्लेखनीय हैं। जूडी मरे जैसी कोच और एम्बेसडर स्थानीय लड़कियों के बीच ट्रेनिंग कैंप चलाकर नई पीढ़ी को टेनिस से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं। स्टेडियम में भी इस साल दर्शक संख्या बढ़ी—हालाँकि अभी भी शुरुआती मैचों में खाली सीटें साफ दिखीं। आयोजन में लगभग 24,000 टिकट बिके, और सेमीफाइनल तथा फाइनल “पूर्ण” बताए गए।
फिर भी, सवाल वही हैं—क्या बढ़ते टिकट, करोड़ों डॉलर की प्राइज मनी और ग्लोबल कवरेज महिलाओं की वास्तविक स्वतंत्रता और अधिकारों का स्थान ले सकते हैं? जब WTA अधिकारी कहते हैं कि वे सऊदी अरब में आयोजन बढ़ाना चाहते हैं, और जब नया नेतृत्व इसकी भविष्य की जगहों पर विचार कर रहा है, तब मानवाधिकार समूह चेतावनी देते हैं कि अगर दबाव नहीं बनाया गया तो प्रगति की संभावना और धीमी हो जाएगी।
WTA फ़ाइनल्स खेल की दुनिया के लिए एक उत्सव हैं, लेकिन महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई के लिए यह एक दर्पण भी है—जो इस बात का संकेत देता है कि कितनी दूर अभी भी सफर बाकी है। चमकदार कोर्ट और ग्लैमरस फाइनल्स के पीछे एक सच्चाई छिपी है—सऊदी अरब बदल रहा है, लेकिन क्या वह बराबरी की दिशा में बदल रहा है? यही वह सवाल है जो आज भी अनुत्तरित है।




