भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील, चिल्का, इस वर्ष अपने न्यूनतम जलस्तर पर पहुँच चुकी है। मानसून में देर और अत्यधिक गर्मी के कारण झील में मीठे पानी का प्रवाह कम हुआ है, जिससे उसका पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ रहा है। इसके चलते प्रवासी पक्षियों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है।
हर साल साइबेरिया, मंगोलिया और कजाकिस्तान से लाखों पक्षी चिल्का झील में प्रवास के लिए आते हैं, लेकिन इस वर्ष उनकी संख्या 30% से कम रही। विशेषज्ञों का कहना है कि जलस्तर गिरने से झील की ऑक्सीजन क्षमता कम हो रही है और उसमें उगने वाले पौधे व मछलियाँ भी प्रभावित हो रही हैं।
झील पर आश्रित मछुआरे समुदाय की आजीविका भी संकट में है। राज्य सरकार ने ‘चिल्का संरक्षण मिशन’ के तहत कुछ कदम उठाए हैं जैसे जल प्रवाह के लिए नहरों की सफाई और औद्योगिक अपशिष्टों पर रोक, लेकिन ज़मीनी कार्यप्रणाली में गति की ज़रूरत है।




