उपराष्ट्रपति पद के चुनावों से पहले विपक्षी दल के उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी ने अपने संदेश में लोकतंत्र की महत्ता और देश की आत्मा को बनाए रखने का जोरदार आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनका उपराष्ट्रपति बनने का उद्देश्य व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की रक्षा और मजबूती है।
सुदर्शन रेड्डी ने सदन के सदस्यों से अपील की कि वे मतदान करते समय केवल पार्टी लाइन या स्वार्थ नहीं, बल्कि देशहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने अपने भाषण में कहा, “यह केवल उप-राष्ट्रपति पद के लिए वोट नहीं है, यह भारत की आत्मा के लिए वोट है। देश को संभालना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
बी. सुदर्शन रेड्डी ने अपने अनुभव और decades-long सार्वजनिक सेवा को आधार बनाकर बताया कि वे राज्यसभा में निष्पक्षता, गरिमा और पारदर्शिता के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने पूर्व उप-राष्ट्रपति और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “लोकतंत्र केवल सरकार का रूप नहीं, बल्कि हर नागरिक के प्रति सम्मान और आदर की भावना है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यसभा का उद्देश्य केवल बहस करना नहीं बल्कि रचनात्मक संवाद और देशहित में नीति निर्माण सुनिश्चित करना होना चाहिए। “हमारे लोकतंत्र की शक्ति सहयोग में है, टकराव में नहीं। मेरा लक्ष्य है कि राज्यसभा में सभी आवाज़ों का सम्मान हो और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहें,” उन्होंने कहा।
बी. सुदर्शन रेड्डी ने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि राजनीतिक लोकतंत्र के साथ सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी उतना ही आवश्यक है। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि राज्यसभा की समितियाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से काम करें और विधायी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता कायम रहे।
उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान मात्र एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा को सुरक्षित रखने का अवसर है, इस विश्वास के साथ उन्होंने सभी सांसदों से न्यायपूर्ण और जिम्मेदार मतदान करने का अनुरोध किया।
समापन में उन्होंने सभी से कहा: “आइए, हम सब मिलकर अपने गणतंत्र को मजबूत बनाएं और एक ऐसी विरासत बनाएं जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व कर सकें। अब निर्णय भारत की जनता और संसद सदस्यों के हाथ में है।”




