बेंगलुरु 13 अक्टूबर 2025
सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने RSS की तुलना तालिबान से की
कर्नाटक में RSS गतिविधियों पर बैन की अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि RSS और तालिबान की सोच में समानता है। यतीेंद्र का दावा है कि RSS, उसी तरह की विचारधारा को बढ़ावा देता है जिसमें “एक विचारधारा ही मान्यता पाये, बाकी को दबाया जाए” — यह बात उन्होंने तालिबान से तुलना करते हुए कही। यतींद्र ने और कहा कि जैसे तालिबान महिलाओं की आज़ादी और विचारों की विविधता पर अंकुश लगाता है, वैसे ही RSS भी “हिंदू धर्म का एक स्वरूप वही स्वीकारे जो उनकी पसंद का हो” — यह असहिष्णुता की मानसिकता है।
बैन की चर्चाएँ और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक की सत्ता में कांग्रेस सरकार ने RSS की सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक लगाने की संभावना की चर्चा तूल पकड़ चुकी है। राज्य के मुख्य सचिव को RSS की गतिविधियों की जांच करने का निर्देश दिया गया है। यतींद्र के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस सरकार इस विवाद को वैचारिक मोर्चे पर केंद्र सरकार और संघ परिवार के खिलाफ उपयोग करना चाहती है। राजनीतिक अभियान के दौरान, इस तरह की टिप्पणियाँ अक्सर स्थिर ध्रुवीकरण की भूमिका निभाती हैं।
संघ परिवार की प्रतिक्रिया और आलोचना
इस बयान पर RSS या भाजपा की ओर से अभी तक औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वाईडी (Yediyurappa) के पुत्र बीवाई विजयेंद्र ने कहा कि संघ एक वैचारिक और सामाजिक संगठन है, न कि किसी कट्टरवादी आंदोलन की तरह केवल एक विचारधारा थोपने वाला समूह। उन्होंने कहा कि RSS ने हमेशा सामाजिक सुधार का काम किया।
विजयेंद्र ने हालांकि यह भी कहा कि यदि किसी संगठन ने बिना पंजीकरण या कानूनी मान्यता के कार्य किया हो, तो प्रशासनिक स्तर पर उसकी जवाबदेही होनी चाहिए।
विश्लेषण: बयान की रणनीति और वैचारिक युद्ध
यतींद्र सिद्धारमैया का बयान सिर्फ एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति की कड़ी लगती है।
- ध्रुवीकरण की रणनीति: RSS को तालिबान जैसा दिखाकर कांग्रेस और विपक्ष के बीच धार्मिक एवं वैचारिक विभाजन खड़ा करने की कोशिश हो सकती है।
- मध्यमार्गी मतदाताओं को जोड़ना: यह बयान उन मतदाताओं पर असर कर सकता है जो धार्मिक कट्टरवाद को स्वीकार नहीं करते लेकिन संघ के विस्तार से चिंित हैं।
- विचारधारात्मक पहचान: कांग्रेस यह संकेत देना चाहती है कि वह धर्मनिरपेक्षता और वैचारिक खुलापन को बढ़ावा देती है, और कोई संगठन अगर सीमाएँ पार कर रहा है, तो उस पर रोक होनी चाहिए। हालाँकि, यह बयान बहुत जोखिम भरा भी है। एक समुदाय या संगठन की तुलना तालिबान से करना नस्लीय या धार्मिक संवेदनशीलता वाले प्रसंग में प्रतिक्रिया और विरोध को आमंत्रित करता है।
कर्नाटक की राजनीति पर असर: वोटधाराओं की जंग
यह बयान कर्नाटक की राजनीति को और गर्माएगा।
RSS का दक्षिण में विस्तार लगातार बढ़ रहा है, और बीजेपी इसे सामाजिक आधार मजबूत करने की रणनीति के रूप में उपयोग कर रही है। अब, कांग्रेस इस विस्तार को वैचारिक खतरा बताकर अपने वोट बैंक, विशेषकर दलित, मुस्लिम और पिछड़े वर्ग, को जकड़ने की कोशिश कर सकती है। लेकिन यदि यह बयान कई मतदाताओं को संघ परिवार के उत्पीड़क विचारधारा जैसा दिखाने की कोशिश हो, तो उल्टा प्रवृत्ति भी हो सकती है — संघ समर्थक वोटर्स में उत्तेजना और प्रतिक्रिया बढ़ सकती है।
बयान, रणनीति या संघ पर निशाना?
यतींद्र सिद्धारमैया का बयान स्पष्ट है — वह RSS को सामाजिक नियंत्रण और विचारधारात्मक हठ का प्रतीक मानते हैं। लेकिन यह केवल उनकी व्यक्तिगत राय नहीं; यह कांग्रेस की रणनीति और कर्नाटक की विचारधारात्मक राजनीति का नया मोड़ है। समय बताएगा कि यह बयान संवाद का तीर बनेगा या राजनीतिक नुकसान का बाण।
एक बात तय है — यह विवाद न सिर्फ़ कर्नाटक बल्कि भारतीय राजनीति में धार्मिक और वैचारिक टकराव की नई लाइन खींचने वाला मुद्दा बन गया है।




