सुनील कुमार | नई दिल्ली 30 दिसंबर 2025
पुलिस की वर्दी पहन के खड़ी हूं, दरोगा हूं मैं, मुंह में यूरिन कर दूंगी, गाड़ी नहीं हटाई तो बेल्ट से पीटूंगी
मेरठ के बांबे बाजार में रविवार देर शाम जो हुआ, उसने पुलिस की वर्दी पर लगे भरोसे को गहरी ठेस पहुंचाई। सड़क पर आम लोगों की आवाजाही के बीच एक महिला दरोगा ने अपनी सरकारी कार से उतरकर पास में बैठे एक कपल को खुलेआम धमकाया। यह कोई साधारण बहस नहीं थी, बल्कि सत्ता के नशे में कही गई ऐसी भाषा थी जिसने इंसानियत और मर्यादा—दोनों को शर्मसार कर दिया। वीडियो में महिला दरोगा साफ कहती सुनाई देती हैं— “पुलिस की वर्दी पहनकर खड़ी हूं, दरोगा हूं मैं… मुंह में यूरिन कर दूंगी।” मामला यहीं नहीं रुका। गुस्से और अहंकार में डूबी दरोगा ने कपल को यह धमकी भी दी कि अगर गाड़ी नहीं हटाई गई तो वह बेल्ट से पीटूंगी। यह सुनकर मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए। कानून की रखवाली करने वाली जब खुद डर और अपमान की भाषा बोले, तो सवाल उठना लाजमी है कि आम आदमी खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगा।
सरकारी काम का बहाना, निजी काम का शक
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला दरोगा सरकारी काम का हवाला देकर पहले मुजफ्फरनगर और फिर मेरठ पहुंची थीं। लेकिन जिस अंदाज़ में वह भीड़भाड़ वाले बाजार में उतरीं और जिस तरह का व्यवहार किया, उसने यह संदेह गहरा कर दिया कि सरकारी वाहन और पद का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया जा रहा था। जब कपल ने विरोध किया, तो बातचीत की जगह धमकी और गाली ने ले ली।
वीडियो वायरल होते ही फूटा जनआक्रोश
पूरी घटना राहगीरों ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर ली। वीडियो सोशल मीडिया पर फैलते ही पुलिस के इस व्यवहार को लेकर गुस्सा भड़क उठा। लोगों ने सवाल उठाए कि क्या वर्दी अब जवाबदेही का नहीं, बल्कि डर पैदा करने का जरिया बनती जा रही है। कई यूज़र्स ने इसे पुलिस विभाग की गरिमा पर सीधा हमला बताया और सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई: दरोगा लाइनहाजिर
वायरल वीडियो और बढ़ते दबाव के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस को आखिरकार कदम उठाना पड़ा। महिला दरोगा रत्ना राठी को लाइनहाजिर कर दिया गया। प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है, लेकिन अब भी यह सवाल कायम है कि क्या सिर्फ लाइनहाजिर करना पर्याप्त है या फिर विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी होगी।
जनता के भरोसे पर चोट
यह घटना ऐसे वक्त सामने आई है जब जनता पुलिस से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की उम्मीद कर रही है। वर्दी का मतलब सुरक्षा, सम्मान और न्याय होना चाहिए—न कि अपमान, गाली और धमकी। अगर ऐसे मामलों में कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाएगा कि सिस्टम अपने लोगों को बचाता है, आम आदमी को नहीं।
मेरठ की यह घटना सिर्फ एक कपल की नहीं है, बल्कि हर उस आदमी की है जो सड़क पर खड़ा होकर पुलिस को देखकर सुरक्षा महसूस करना चाहता है। वर्दी इज्जत मांगती है, डर नहीं। और जो वर्दी को बदनाम करे, उसे कानून के सबसे सख्त सबक की जरूरत है।




