एबीसी डेस्क 5 जनवरी 2026
ग़रीबी आदमी से क्या-क्या रिस्क नहीं करवाती—इस सवाल का जवाब बनकर सामने आया एक छोटा सा वीडियो, जिसने देखने वालों के रोंगटे खड़े कर दिए। यह कोई फ़िल्मी सीन नहीं, न ही किसी स्टंट का हिस्सा… यह भारत की उस सच्चाई की झलक है, जिसे अक्सर हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं। वीडियो में एक गरीब महिला फुल स्पीड में दौड़ती ट्रेन के दो डिब्बों के बीच लगे एक पतले से लोहे के टुकड़े पर बैठकर सफर करती दिखती है। नीचे पटरियाँ हैं, ऊपर मौत की सांसें। ट्रेन की रफ्तार से भी तेज़ ठंडी हवा उसके शरीर से टकरा रही है। ठंड से सिकुड़ी हुई महिला शॉल में खुद को लपेटे हुए है, लेकिन वो शॉल ठंड से ज़्यादा उसे गिरने से बचाने की आख़िरी कोशिश लगती है। हर झटका, हर मोड़, हर सेकंड—मौत को खुला न्योता देता दिखता है।
यह सफर किसी मंज़िल तक पहुँचने का नहीं, बल्कि ज़िंदा बच जाने की जंग का है। पैसों की कमी ने इस महिला को टिकट से वंचित कर दिया, और सिस्टम की बेरुख़ी ने उसे ज़िंदगी और मौत के बीच झूलने पर मजबूर कर दिया। न कोई सुरक्षा, न कोई सवाल पूछने वाला—बस हालात हैं, जो इंसान को हैवानियत की हद तक जोखिम उठाने पर मजबूर कर देते हैं।
विडंबना देखिए—इसी देश में एक तरफ़ उद्योगपति अपने बेटे की शादी पर हज़ारों करोड़ रुपये पानी की तरह बहा देते हैं, और दूसरी तरफ़ एक गरीब महिला सिर्फ़ सफर के किराए के अभाव में अपनी जान दांव पर लगा देती है। एक देश, दो सच्चाइयाँ—एक में जश्न है, दूसरी में सिर्फ़ संघर्ष।
यह वीडियो किस ट्रेन का है, कहां का है—यह अभी साफ़ नहीं हो पाया है। इतना भर पता है कि इसे किसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया है। वीडियो छोटा है, लेकिन असर बेहद गहरा। यह वीडियो सवाल पूछता है—क्या हमारी तरक़्क़ी इतनी खोखली है कि उसमें गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?
यह सिर्फ़ एक महिला की कहानी नहीं है। यह उस भारत की तस्वीर है, जहां ग़रीबी इंसान से उसका डर छीन लेती है, क्योंकि उसके पास खोने को पहले से ही कुछ नहीं बचता।




