Home » National » 69 लाख वोट काटने से शुरू हुआ खेल, अब 12 राज्यों में लोकतंत्र के कत्ल की साजिश : कांग्रेस

69 लाख वोट काटने से शुरू हुआ खेल, अब 12 राज्यों में लोकतंत्र के कत्ल की साजिश : कांग्रेस

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2025

कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार और चुनाव आयोग (ECI) पर अब तक का सबसे गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि देश के 12 राज्यों में शुरू किया जाने वाला SIR (Special Intensive Revision) कोई सामान्य मतदाता सूची पुनरीक्षण नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित “वोट चोरी अभियान” है जिसके तहत विपक्षी वोटरों को सूची से गायब कर देने की साजिश रची जा रही है। AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि “बिहार में SIR के नाम पर लोकतंत्र की लूट की शुरुआत की गई थी और अब उसी ब्लूप्रिंट को 12 राज्यों में लागू करने की तैयारी है। यह देश के मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। मोदी सरकार और चुनाव आयोग ने मिलकर चुनावी चोरी को सरकारी मोहर देने का काम किया है।”

बिहार में 69 लाख वोट काटे गए — अब 12 राज्यों में होगी करोड़ों वोटों की सफाई

कांग्रेस ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां SIR प्रक्रिया लागू की गई थी, तब 69 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इनमें से अधिकांश गरीब, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति-जनजाति और विपक्षी समर्थक वर्ग के लोग थे। पार्टी ने कहा कि अब वही “सिस्टमेटिक कटिंग ऑपरेशन” 12 अन्य राज्यों में दोहराया जाने वाला है, जिसके तहत करोड़ों नागरिकों को उनके वोट के अधिकार से वंचित किया जाएगा।

पवन खेड़ा ने कहा कि “यह किसी त्रुटि सुधार का काम नहीं, बल्कि सत्ता सुधार का खेल है। मोदी सरकार और चुनाव आयोग लोकतंत्र को एक नियंत्रित प्रणाली में बदलना चाहते हैं, जहाँ जनता की मर्जी नहीं बल्कि सत्ता की मंशा तय करेगी कि कौन वोट देगा और कौन नहीं।”

उन्होंने आगे कहा कि जब बिहार में इतनी बड़ी गड़बड़ी हुई, तब चुनाव आयोग ने न तो कोई जांच की, न कोई स्पष्टीकरण दिया। सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए आयोग को फटकार लगाई थी, फिर भी ECI की नीयत में कोई बदलाव नहीं आया। बल्कि अब वही भ्रष्ट मॉडल देश के बाकी हिस्सों में फैलाया जा रहा है। “बिहार प्रयोगशाला थी, अब पूरा देश प्रयोग का मैदान बनाया जा रहा है,” खेड़ा ने कहा।

“सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं सुधरा चुनाव आयोग”

कांग्रेस ने कहा कि बिहार में जब SIR की प्रक्रिया चली, तब जनता के बीच भारी आक्रोश फैला था क्योंकि लाखों लोगों के नाम बिना किसी कारण हटाए गए थे। जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो अदालत ने खुद कहा कि “चुनाव आयोग पारदर्शिता की कमी और लापरवाही से जनता के अधिकारों का हनन कर रहा है।” खेड़ा ने कहा, “जिस संस्था को लोकतंत्र का रक्षक कहा जाता है, वही आज उसका गला घोंटने में लगी है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि बिना कारण नाम हटाना नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। लेकिन चुनाव आयोग ने इस फटकार को नज़रअंदाज़ किया और अब वही धोखाधड़ी पूरे देश में लागू कर रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बिहार के SIR को लेकर आयोग ईमानदार होता, तो वह सार्वजनिक रूप से यह बताता कि 69 लाख नाम क्यों और किस आधार पर हटाए गए? लेकिन आयोग आज तक इस पर चुप है, और अब 12 राज्यों में वही प्रयोग दोहराया जा रहा है।

“वोट जोड़ने और काटने का खेल — डिजिटल युग की सबसे बड़ी ठगी”

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आज वोट चोरी का तरीका बदल गया है। अब न तो बूथ कैप्चरिंग करनी पड़ती है और न ही बैलेट बॉक्स लूटने पड़ते हैं। अब चोरी डेटा के जरिए होती है। खेड़ा ने कहा, “यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक ठगी है। अब ‘वोट चोरी’ सॉफ्टवेयर, एल्गोरिद्म और फर्जी डेटा ऑपरेशन के ज़रिए की जाती है। जहां विपक्ष मजबूत होता है, वहां मतदाता सूची से नाम गायब हो जाते हैं, और जहां सत्ता को बढ़त चाहिए, वहां फर्जी वोटर जुड़ जाते हैं। यह सब चुनाव आयोग की जानकारी में होता है, और कई बार उसकी मौन स्वीकृति से।”

उन्होंने कहा कि कई राज्यों में अब यह देखा जा रहा है कि विपक्षी कार्यकर्ताओं के इलाकों में अचानक सैकड़ों वोटरों के नाम लिस्ट से गायब हो जाते हैं, जबकि उसी बूथ पर सत्ता पक्ष के वोटर “सही सलामत” बने रहते हैं। यह ‘प्रशासनिक गलती’ नहीं बल्कि राजनीतिक साजिश है।

“जब खुद आयोग ही चोरी में शामिल हो जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे?”

कांग्रेस ने तीखा आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब “स्वतंत्र संवैधानिक संस्था” नहीं रहा, बल्कि “सत्तारूढ़ दल का चुनावी औजार” बन गया है। खेड़ा ने कहा, “पहले आयोग जनता की निगरानी करता था, अब वह सरकार की सुविधा देखता है। जिस आयोग को मतदाता की आवाज़ सुननी चाहिए थी, वह अब प्रधानमंत्री के इशारों पर चल रहा है। यह वही संस्था है जो वोटों की चोरी पर चुप है और लोकतंत्र की हत्या में साझेदार बनी हुई है।”

उन्होंने कहा कि आयोग को कम से कम बिहार के SIR से जुड़े सवालों के जवाब देने चाहिए थे — कितने नाम हटे, कितने जोड़े गए, किन मानकों पर निर्णय लिया गया — लेकिन आयोग ने इस सब पर पर्दा डाल दिया। “चुनाव आयोग ने अपनी निष्ठा संविधान से हटाकर सत्ता से जोड़ ली है, और यह लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है,” खेड़ा ने जोड़ा।

“राहुल गांधी के आलंद केस ने खोली सिस्टम की पोल”

कांग्रेस ने याद दिलाया कि राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र आलंद विधानसभा में जब वोट चोरी का मामला सामने आया, तो जांच से चौंकाने वाले खुलासे हुए। SIT ने पाया कि मतदाता सूची से नाम काटने का एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल नेटवर्क ऑपरेशन चलाया जा रहा था, जिसमें डेटा बेस के माध्यम से चयनित इलाकों में विपक्षी वोटरों को टारगेट कर हटाया जा रहा था। खेड़ा ने कहा कि “अब वही सिस्टम SIR के नाम पर कानूनी वैधता पा गया है। अब यह चोरी प्रशासनिक आदेश के रूप में की जा रही है।”

उन्होंने कहा कि जब किसी देश में विपक्ष को अपने वोटरों को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़े, तब समझ लीजिए कि लोकतंत्र अपनी मूल आत्मा खो चुका है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार और चुनाव आयोग मिलकर देश को एक नियंत्रित लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं — जहां चुनाव तो होंगे, लेकिन नतीजे पहले से तय होंगे।

“जनता के अधिकारों पर खुला हमला, लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील”

कांग्रेस ने कहा कि 12 राज्यों में होने वाला SIR किसी भी दृष्टि से पारदर्शी नहीं है। न तो इसकी प्रक्रिया जनता के सामने रखी गई, न ही इसके मानक स्पष्ट किए गए।

खेड़ा ने कहा, “यह अब कोई ‘सुधार अभियान’ नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों पर डाका है। यह ऐसा ऑपरेशन है, जिसमें जनता की भागीदारी खत्म की जा रही है ताकि सत्ता तय करे कि कौन नागरिक है और कौन नहीं।”

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोकतंत्र को धीरे-धीरे कमजोर कर रही है। पहले एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया, अब मतदाता सूची को हथियार बना दिया गया है।

“जिस दिन वोटर की सूची को नियंत्रित कर लिया जाएगा, उसी दिन लोकतंत्र का ताबूत बंद हो जाएगा। यही लक्ष्य है इस SIR का — और यही कारण है कि कांग्रेस इसे जनता के खिलाफ साजिश मानती है,” उन्होंने कहा।

“कांग्रेस शुरू करेगी ‘वोट चोरी बंद करो’ आंदोलन”

पवन खेड़ा ने घोषणा की कि कांग्रेस देशभर में “वोट चोरी बंद करो” अभियान शुरू करेगी। यह आंदोलन न केवल राजनीतिक दलों को एकजुट करेगा, बल्कि हर नागरिक को अपने मताधिकार की रक्षा के लिए जागरूक करेगा।

उन्होंने कहा, “हम हर राज्य में जनता से अपील करेंगे कि वे अपनी वोटर लिस्ट की जांच करें, अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराएं और लोकतंत्र की इस लूट के खिलाफ आवाज उठाएं। अगर चुनाव आयोग जनता के साथ नहीं है, तो जनता ही अब अपना आयोग बनेगी।”

यह सिर्फ चुनाव नहीं, लोकतंत्र की आत्मा की लड़ाई है

कांग्रेस का यह बयान किसी साधारण राजनीतिक आरोप से कहीं आगे है। यह उस भय की झलक है जो आज हर लोकतांत्रिक नागरिक के मन में है — कि कहीं उसका वोट, उसकी पहचान और उसका अधिकार किसी “डेटा फाइल” में मिटाया न जा रहा हो। अगर यह SIR अभियान बिना जवाबदेही के 12 राज्यों में चला, तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए अब तक का सबसे बड़ा खतरा साबित होगा। जैसा कि पवन खेड़ा ने कहा, “लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है। और जब वही वोट चोरी हो जाए, तो चुनाव नहीं, तानाशाही होती है।”

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments