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मोदी सरकार के भ्रष्टाचार का चेहरा बेनकाब – जोकर महल में घुसा तो राजा नहीं बना, महल सर्कस बन गया : पवन खेड़ा

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नई दिल्ली | 28 मार्च 2026 | ABC NATIONAL NEWS

मोदी सरकार के भ्रष्टाचार का चेहरा बेनकाब – जोकर महल में घुसा तो राजा नहीं बना, महल सर्कस बन गया– कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के इस तीखे हमले ने राजनीतिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यूपीए सरकार को भ्रष्टाचार के आरोपों के नाम पर सत्ता से बाहर किया गया था, लेकिन पिछले बारह सालों से भाजपा फाइलों को पन्ना दर पन्ना छान रही है, जांच एजेंसियों को लगाकर केस दर्ज कर रही है, फिर भी एक-एक करके सभी आरोप झूठे और बेबुनियाद साबित हो चुके हैं। उन्होंने साफ कहा कि ये सब केवल विपक्ष को बदनाम करने और सत्ता पर काबिज रहने का फर्जी प्रचार था, जिसमें कोई सच्चाई नहीं थी।

पवन खेड़ा ने आगे हमला बोलते हुए कहा कि एनडीए सरकार को सत्ता छोड़ने का इंतजार भी नहीं करना पड़ा क्योंकि भाजपा ने सत्ता में आते ही भ्रष्टाचार मुक्त शासन का बड़ा-बड़ा वादा किया था, लेकिन हकीकत में उसने ठीक उलटा कर दिखाया। पीएम केयर्स फंड, इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में भारी अनियमितताएं और जीएसटी संग्रह में लगातार गड़बड़ियां जैसी कई बड़ी अनियमितताएं और घोटाले सत्ता में रहते हुए ही सामने आ चुके हैं। खेड़ा का आरोप है कि ये सारे मामले ऊपर से मंजूरी प्राप्त और संस्थागत स्तर पर चलाए जा रहे भ्रष्टाचार के पैटर्न को साफ उजागर करते हैं, जहां सत्ता के शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार को न सिर्फ बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि उसे पूरी तरह वैध ठहराने की कोशिश भी की जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब कोई जोकर महल में घुसता है तो वह राजा नहीं बन जाता, उल्टा पूरा महल सर्कस बन जाता है।

कांग्रेस नेता ने यूपीए के समय के घोटालों को लेकर भाजपा द्वारा मचाए गए शोर का जिक्र करते हुए कहा कि आज खुद भाजपा की सरकार में और भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है। उन्होंने इलेक्टोरल बॉन्ड को खास निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि यह स्कीम बड़े-बड़े कारोबारियों से चंदा वसूलने और फिर सरकारी नीतियों को उनके पक्ष में मोड़ने का कानूनी और व्यवस्थित तरीका साबित हुई। पीएम केयर्स फंड को लेकर भी पवन खेड़ा ने सवाल उठाए कि इस फंड में जमा भारी-भरकम रकम का लेखा-जोखा पूरी तरह अपारदर्शी है और इसका इस्तेमाल कहां-कहां हुआ, इस पर सरकार ने आज तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर में हुई गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लाखों करोड़ रुपये के ट्रांसफर में अनियमितताएं सामने आई हैं, जिससे आम आदमी को भारी नुकसान हुआ है और कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया है।

पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने का नाटक तो करती है लेकिन असल में अपनी सरकार को बचाने के लिए जांच एजेंसियों का खुलकर दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय के आरोपों पर बार-बार जांच चल रही है लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिल रहा, जबकि भाजपा शासन में सामने आए घोटालों पर सरकार पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। उनका बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठा रहा है और जनता के बीच भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे की असलियत तेजी से उजागर हो रही है। पवन खेड़ा ने साफ कहा कि भाजपा ने सत्ता में रहते हुए जो कुछ किया है, वह यूपीए से कहीं ज्यादा संगठित, खतरनाक और संस्थागत स्तर का भ्रष्टाचार है क्योंकि यह सत्ता के शीर्ष से पूरा संरक्षण प्राप्त कर रहा है।

इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कई विपक्षी दलों ने पवन खेड़ा के आरोपों का खुलकर समर्थन किया है और मांग की है कि इन मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा हो तथा स्वतंत्र जांच एजेंसी द्वारा जांच कराई जाए। वहीं सत्ताधारी भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी इन आरोपों को महज राजनीतिक प्रचार और पुरानी बातों को दोहराने के रूप में खारिज करने की तैयारी में है। कुल मिलाकर पवन खेड़ा का यह आक्रामक हमला मोदी सरकार की छवि पर एक और बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर उस समय जब देश में महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर पहले से ही सरकार घिरी हुई है। आने वाले दिनों में यह विवाद और भी तीखा होने की पूरी संभावना है क्योंकि विपक्ष इन मुद्दों को आने वाले चुनावों में बड़ा हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।

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