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आ गया दुश्मन देशों का काल: भारत का IADWS एयर डिफेंस सिस्टम, आसमान में मचाएगा तबाही

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नई दिल्ली 24 अगस्त 2025

भारत ने अपनी रक्षा क्षमता को और मज़बूत करते हुए IADWS (Integrated Air Defence Weapon System) को शामिल करने की तैयारी तेज़ कर दी है। यह अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम दुश्मन देशों—खासकर चीन और पाकिस्तान—की मिसाइल और हवाई हमलों को हवा में ही ध्वस्त करने में सक्षम है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, IADWS सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी फुर्ती और सटीकता है। यह सिस्टम सेकंडों में दुश्मन की मिसाइल, फाइटर जेट या ड्रोन को पहचान कर उन्हें इंटरसेप्ट कर सकता है। इसमें रडार, मिसाइल लॉन्चर्स और एडवांस कमांड कंट्रोल यूनिट्स शामिल हैं, जो इसे एक 360 डिग्री एयर शील्ड बनाते हैं।

खबरों के मुताबिक, IADWS को अमेरिकी टेक्नोलॉजी और भारतीय जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। यह सिस्टम आसमान से बरसने वाली हर तबाही को रोकने में सक्षम होगा और भारतीय सीमा को एक लोहे की दीवार जैसा सुरक्षा कवच प्रदान करेगा।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस सिस्टम के आने से चीन और पाकिस्तान की ओर से किसी भी तरह की आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकेगा। खासकर सीमा पर बढ़ते ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए IADWS भारत की रक्षा नीति में गेमचेंजर साबित हो सकता है।

भारतीय सेना के सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में यह सिस्टम संवेदनशील सीमा क्षेत्रों और बड़े शहरों में तैनात किया जाएगा, जिससे दुश्मन की हर कोशिश नाकाम हो जाएगी।

 IADWS यानी इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस वेपन सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह सिस्टम दुश्मन देशों से आने वाले मिसाइल, ड्रोन और फाइटर जेट जैसे हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक मल्टी-लेयर्ड सुरक्षा कवच प्रदान करता है। यानी यह अलग-अलग स्तरों पर हवाई हमलों से निपट सकता है—चाहे वह बहुत छोटे ड्रोन हों, मध्यम दूरी की मिसाइलें हों या फिर उच्च गति से उड़ने वाले लड़ाकू विमान। भारत के लिए यह तकनीक खास तौर पर चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से उत्पन्न खतरों के मद्देनज़र एक बड़ा गेमचेंजर मानी जा रही है।

IADWS में कई तरह के हथियार एक साथ समाहित हैं। इसमें सबसे पहले आता है QRSAM यानी क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम। यह स्वदेशी तकनीक से बना मिसाइल सिस्टम है जो मध्यम दूरी तक आने वाले खतरों को कुछ ही सेकंड में भांपकर उन्हें हवा में नष्ट कर देता है। इसके साथ ही इसमें VSHORADS (वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम) शामिल है, जो बहुत नज़दीकी दूरी पर हमला करने वाले ड्रोन, हेलीकॉप्टर या हल्के विमानों को खत्म करने में सक्षम है। इस तरह QRSAM और VSHORADS मिलकर IADWS को दोहरी शक्ति प्रदान करते हैं, जिससे यह अलग-अलग स्तर पर आने वाले खतरों का सामना करने में सक्षम हो जाता है।

इस प्रणाली का सबसे आधुनिक और भविष्यवादी हथियार है DEW (डायरेक्टेड एनर्जी वेपन), जिसे आम भाषा में हाई-पावर लेज़र हथियार कहा जाता है। DEW के कई वर्ज़न विकसित किए गए हैं—Mk1, Mk2 और Mk2A। Mk1 संस्करण 2 किलोवॉट लेज़र शक्ति का है जो 1 किलोमीटर तक प्रभावी है और छोटे ड्रोन को गिराने में सक्षम है। Mk2 में यह क्षमता बढ़कर लगभग 12 किलोवॉट हो जाती है और यह 2 किलोमीटर से अधिक दूरी तक दुश्मन को निशाना बना सकता है। Mk2A सबसे उन्नत मॉडल है जिसकी शक्ति 30 किलोवॉट है और यह 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के लक्ष्यों को नष्ट कर सकता है। भविष्य में 50 किलोवॉट से 100 किलोवॉट तक की लेज़र शक्ति वाले हथियार भी विकसित करने की योजना है, जो क्रूज़ मिसाइल और तेज़ गति वाले हवाई जहाज़ों को रोकने की क्षमता देंगे।

तकनीकी दृष्टि से देखा जाए तो IADWS का कमांड और कंट्रोल सिस्टम अत्याधुनिक है। इसमें एकीकृत रडार और ट्रैकिंग सिस्टम है, जो 360 डिग्री कवरेज के साथ दुश्मन के खतरे को पहचान लेता है। इसके बाद केंद्रीय कंट्रोल यूनिट से आदेश मिलते ही मिसाइल या लेज़र हथियार सक्रिय होकर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशन कहा जा सकता है, जिसमें हर हथियार और सेंसर एक-दूसरे से जुड़ा होता है और साझा डेटा पर काम करता है। यही वजह है कि यह सिस्टम एक साथ कई लक्ष्यों को अलग-अलग ऊँचाई और दूरी पर पहचानकर उन्हें नष्ट कर सकता है।

भारत में इस प्रणाली का हालिया परीक्षण ओडिशा तट पर हुआ, जिसमें तीन अलग-अलग हवाई लक्ष्यों—दो हाई-स्पीड UAV और एक मल्टी-कॉप्टर ड्रोन—को सफलता पूर्वक मार गिराया गया। यह साबित करता है कि IADWS न केवल मिसाइलों और फाइटर जेट्स जैसे बड़े खतरों से निपट सकता है बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती यानी ड्रोन वॉरफेयर को भी मात देने में सक्षम है। यही कारण है कि रक्षा विश्लेषक इसे भारत के लिए “लोहे का हवाई कवच” मान रहे हैं।

आने वाले समय में IADWS को भारत की संवेदनशील सीमाओं और बड़े महानगरों में तैनात किया जाएगा। यह सिस्टम दुश्मन की हर साजिश को नाकाम करने के लिए तैयार है और भारतीय सेना को एक ऐसी क्षमता प्रदान करता है, जो पहले केवल गिने-चुने देशों के पास थी। यह कहना गलत नहीं होगा कि IADWS भारतीय रक्षा व्यवस्था में वही स्थान हासिल कर सकता है, जो परमाणु हथियारों ने रणनीतिक प्रतिरोध (Strategic Deterrence) के क्षेत्र में किया था।

 

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