एबीसी डेस्क 27 नवंबर 2025
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में सिरदर्द, बॉडी पेन, माइग्रेन, कमर दर्द, मासिक धर्म दर्द या मांसपेशियों में जकड़न जैसे हालात आम हो गए हैं। ऐसे में बहुत से लोग तुरंत राहत पाने के लिए पेनकिलर की गोली खा लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों की मानें तो पेनकिलर शरीर को राहत देने जितना मदद करती हैं, उतना ही नुकसान भी पहुंचा सकती हैं—खासकर तब, जब व्यक्ति इन्हें बार-बार या जरूरत से ज्यादा मात्रा में लेने लगे। आधुनिक चिकित्सा में पेनकिलर को ’इमरजेंसी रिलीफ मेडिसिन’ कहा जाता है, लेकिन भारत सहित पूरी दुनिया में इन दवाओं का अनियंत्रित इस्तेमाल बढ़ता ही जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दर्द छिपाने के लिए अगर दर्दनाशक दवाओं का लगातार सेवन किया जाए, तो शरीर अंदर ही अंदर कई गंभीर समस्याओं का घर बन सकता है।
अधिक मात्रा में पेनकिलर लेने का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह धीरे-धीरे किडनी, लिवर और पेट की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाती हैं। डॉक्टर बताते हैं कि कई सामान्य OTC (ओवर द काउंटर) दर्दनाशक दवाएँ पेट में एसिडिटी बढ़ाती हैं, जिससे अल्सर, ब्लीडिंग, और गैस्ट्राइटिस जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। लगातार सेवन से किडनी पर दबाव बढ़ता है, और लंबे समय बाद यह किडनी फेलियर जैसा गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। वहीं, लिवर को नुकसान तब बढ़ जाता है जब कोई व्यक्ति पेनकिलर को अल्कोहल के साथ लेता है—यह संयोजन डॉक्टरों के अनुसार शरीर के लिए “डेडली कॉकटेल” साबित होता है। कई पेनकिलर ब्लड प्रेशर नियंत्रण पर भी असर डालती हैं, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही नहीं, दर्दनाशक दवाओं की आदत भी लग सकती है—एक दिन गोली लेने से राहत मिली तो अगले दिन शरीर खुद ही उसी डायरेक्ट रिलीफ की मांग करने लगता है।
डॉक्टरों की सलाह साफ है—दर्दनाशक दवाएँ सिर्फ तब लें जब दर्द सहने योग्य न हो, और वह भी डॉक्टर की दवाइयों के साथ संतुलित मात्रा में। विशेषज्ञों के अनुसार, “हर दर्द पेनकिलर से नहीं दबाया जा सकता, क्योंकि दर्द शरीर का अलार्म सिस्टम है।” यानी जिस भाग में दर्द हो रहा है, वहाँ कोई समस्या हो सकती है—मसल्स ओवरलोड, सूजन, पोषण की कमी, गलत बैठने की आदतें, हार्मोनल बदलाव, या तनाव। लगातार दर्द होते हुए भी पेनकिलर खाते रहना ऐसा है जैसे बिजली के शॉर्ट सर्किट को देखने के बजाय केवल अलार्म की आवाज़ बंद कर देना। डॉक्टर बार-बार चेतावनी देते हैं कि लक्षण दबाने से बीमारी बढ़ती है, खत्म नहीं होती।
लेकिन सवाल यह है—अगर शरीर खुद पेनकिलर “मांगे” तो क्या किया जाए? विशेषज्ञ कहते हैं कि यह स्थिति तब आती है जब शरीर को असली राहत नहीं मिली होती, सिर्फ अस्थायी आराम मिला होता है। इस स्थिति में दवा खाने से पहले शरीर को समझना ज़रूरी है—दर्द किस वजह से है? क्या मांसपेशियाँ जकड़ी हुई हैं? क्या शरीर थका हुआ है? क्या नींद पूरी नहीं हो रही? क्या पानी कम पिया गया? क्या विटामिन D, B12 या आयरन की कमी है? क्या बैठने का तरीका गलत है? डॉक्टरों के मुताबिक, शरीर जब बार-बार दर्द की आवाज़ देता है, तो वह मदद मांग रहा है—पेनकिलर नहीं।
दर्द से छुटकारा पाने के सुरक्षित और स्थायी तरीके भी मौजूद हैं, जिन्हें अपनाकर बिना खतरे के आराम पाया जा सकता है। इनमें शामिल हैं—नियमित स्ट्रेचिंग, हल्का व्यायाम, गर्म या ठंडी सिकाई, पर्याप्त पानी पीना, संतुलित भोजन, पौष्टिक तत्वों की भरपाई, नींद पूरी करना और तनाव को नियंत्रित करना। मांसपेशियों के दर्द में फिजियोथेरेपी और हल्के व्यायाम अद्भुत राहत देते हैं। पीठ या गर्दन के दर्द में posture correction बेहद असरदार है। महिलाओं में हार्मोनल दर्द के लिए डॉक्टर योग, हाइड्रेशन और कैल्शियम सपोर्ट की सलाह देते हैं। लगातार या गंभीर दर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जांच कराना सबसे सुरक्षित रास्ता है—क्योंकि हर दर्द अपने भीतर कोई कहानी छिपाए बैठा होता है और उसे दबाने से वह कहानी खतरे में बदल सकती है।
अंत में डॉक्टरों की सीधी सलाह—“दर्द को समझें, दवा को नहीं। पेनकिलर इमरजेंसी में ठीक हैं, आदत में नहीं।




