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मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, नागा युवकों के अपहरण मामले में CM ने दिया NIA जांच का आश्वासन

राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | इंफाल/गुवाहाटी | 24 मई 2026

मणिपुर एक बार फिर गंभीर जातीय तनाव और बंधक संकट की चपेट में आता दिखाई दे रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कथित तौर पर छह नागा युवकों के अपहरण मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने का आश्वासन दिया है। आरोप है कि इन युवकों का अपहरण कुकी उग्रवादियों द्वारा किया गया है। इस बीच राज्य में पहले से जारी अविश्वास और हिंसा के माहौल ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने इंफाल में यूनाइटेड नागा काउंसिल के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर हालात पर चर्चा की और कहा कि सरकार मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है।

दूसरी ओर, मणिपुर की कुकी समुदाय की शीर्ष संस्था “कुकी इनपी मणिपुर” ने 13 मई से जारी बंद को अगले 48 घंटे के लिए और बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यह कदम उन 14 कुकी लोगों की रिहाई के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिन्हें कथित तौर पर नागा समूहों ने बंधक बना रखा है। इनमें तीन नाबालिग छात्र भी शामिल बताए जा रहे हैं। कुकी संगठन ने कहा कि यह आंदोलन कुकी-जो समुदाय के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी है। लगातार बढ़ते बंद और तनाव के कारण राज्य के कई इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मणिपुर में लंबे समय से चली आ रही जातीय और क्षेत्रीय खींचतान अब और अधिक जटिल रूप लेती जा रही है। नागा और कुकी समुदायों के बीच बढ़ती अविश्वास की खाई राज्य की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। पिछले कई महीनों से मणिपुर अलग-अलग समुदायों के बीच संघर्ष, हिंसा, सड़क बंदी और प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में किसी भी अपहरण या बंधक संकट की घटना हालात को और विस्फोटक बना सकती है।

राजनीतिक और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुरक्षा बलों की कार्रवाई से स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं होगी, बल्कि समुदायों के बीच संवाद, विश्वास बहाली और राजनीतिक समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास जरूरी हैं। केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन पर अब यह दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाएं। फिलहाल पूरे राज्य की नजर इस बात पर टिकी है कि बंधक बनाए गए लोगों की सुरक्षित रिहाई कब और कैसे सुनिश्चित हो पाती है, क्योंकि यही आने वाले दिनों में मणिपुर के हालात तय कर सकता है।

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