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तेलंगाना में निवेश धमाका: 48 घंटे में ₹5.75 लाख करोड़—100 यूनिकॉर्न का रोडमैप तैयार

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गुंजन कुमार । हैदराबाद 11 दिसंबर 2025

तेलंगाना ने अपने गठन के एक दशक बाद पहली बार इतना बड़ा आर्थिक धमाका दर्ज किया है। तेलंगाना राइजिंग ग्लोबल समिट ने न सिर्फ दुनिया की निगाहें हैदराबाद पर टिका दीं, बल्कि महज 48 घंटे में राज्य को ₹5.75 लाख करोड़ के रिकॉर्ड निवेश करार भी दिला दिए। यह आंकड़ा सिर्फ एक आर्थिक संकेत नहीं, बल्कि यह संदेश है कि तेलंगाना अब भारत का नया ग्रोथ इंजन बनने को तैयार है। समिट में देश-विदेश के दिग्गज उद्योगपतियों, CEOs, कूटनीतिज्ञों से लेकर फिल्म स्टार चिरंजीवी और वैश्विक नेताओं तक ने तेलंगाना के विज़न और नई सरकार की प्राथमिकताओं को सराहा। इसी दौरान चिरंजीवी और आनंद महिंद्रा की मुलाकात भी चर्चा में रही, जहाँ दोनों ने एक-दूसरे के विनम्रता और दूरदर्शिता की खुलकर प्रशंसा की।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने समिट में एक बड़े ऐलान के साथ स्टार्टअप दुनिया में नई उम्मीद जगा दी। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ₹1,000 करोड़ का स्टार्टअप फंड स्थापित कर रही है, जिसका उद्देश्य सिर्फ नए स्टार्टअप शुरू कराना नहीं, बल्कि उन्हें 1 बिलियन डॉलर वैल्यू वाली कंपनियों—यानी यूनिकॉर्न स्तर—तक पहुंचाने में मदद करना है। रेवंत रेड्डी ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में हैदराबाद से कम से कम 100 स्टार्टअप यूनिकॉर्न बनेंगे और इनमें से 10 तो सुपर यूनिकॉर्न के स्तर (10 बिलियन डॉलर वैल्यू) तक पहुंचेंगे। यह घोषणा उन युवाओं, इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए एक बड़ा संदेश है जो हैदराबाद को भारत की सिलिकॉन वैली से आगे जाते देखना चाहते हैं।

निवेश करारों में डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, EV, लॉजिस्टिक्स, AI, फार्मा और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टरों का बोलबाला रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश न सिर्फ लाखों रोजगार पैदा करेगा बल्कि तेलंगाना की GSDP को अगले पाँच वर्षों में कई गुना तक बढ़ा सकता है। पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर दुर्वुरी सुब्बा राव ने भी मंच से तेलंगाना की प्रगति, डिजिटल मजबूती और 2014 के बाद हुई आर्थिक उछाल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि तेलंगाना ने साबित किया है कि यदि नीति पारदर्शी हो और दिशा स्पष्ट, तो निवेश खुद-ब-खुद आकर्षित होता है।

हालाँकि इस समिट की चमक के बीच उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने भविष्य और नौकरियों को लेकर चिंता भी जाहिर की। समिट के बाहर हुए विरोध प्रदर्शनों में छात्रों ने सरकार से साफ-साफ पूछा कि बड़े निवेश के वादे तो हो रहे हैं, लेकिन युवाओं को स्थायी और सुरक्षित रोजगार कब मिलेंगे? यह विरोध बताता है कि विकास के दावों के साथ-साथ रोजगार पर ठोस और समयबद्ध रोडमैप भी उतना ही जरूरी है।

लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि तेलंगाना ने इन 48 घंटों में वह कर दिखाया है जो कई राज्यों को सालों में भी हासिल नहीं होता। नए निवेश, स्टार्टअप्स को नई ताकत, वैश्विक विश्वास और दमदार लक्ष्य—ये सब मिलकर बताते हैं कि तेलंगाना सिर्फ विकास की राह पर नहीं, बल्कि तेजी से उभरते भारत के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है।

“Telangana Rising 2047” सिर्फ एक नारा नहीं, एक नया मिशन दिखाई देता है।

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