एबीसी नेशनल न्यूज | नई दिल्ली/तेहरान | 14 मार्च 2026
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेताओं के बारे में जानकारी देने पर 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम घोषित किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के Rewards for Justice Program के तहत जारी इस सूची में ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।
अमेरिका ने दावा किया है कि ये अधिकारी Islamic Revolutionary Guard Corps (आईआरजीसी) से जुड़े हैं और वैश्विक स्तर पर सैन्य तथा खुफिया गतिविधियों का संचालन करते हैं। हालांकि तेहरान ने इस कदम को “राजनीतिक दबाव और प्रचार युद्ध” करार दिया है।
तेहरान का पलटवार
ईरान के राजनीतिक विश्लेषकों और सरकारी सूत्रों का कहना है कि अमेरिका का यह कदम उसकी “कमजोर कूटनीति” को दर्शाता है। उनका कहना है कि जब सैन्य और राजनीतिक मोर्चे पर दबाव बढ़ता है, तब वाशिंगटन इस तरह के इनाम और आरोपों के जरिए अंतरराष्ट्रीय माहौल को प्रभावित करने की कोशिश करता है।
ईरानी हलकों का कहना है कि अमेरिका वर्षों से आईआरजीसी को निशाना बनाता रहा है, जबकि यह संगठन देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए बनाया गया था।
खामेनेई की नई नेतृत्व भूमिका
हाल ही में ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei बने हैं, जिन्होंने अपने पिता Ali Khamenei के निधन के बाद पद संभाला। फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में अली खामेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं।
इन घटनाओं के बाद ईरान में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ गुस्सा और भी बढ़ गया है। तेहरान का कहना है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का खुला उल्लंघन था।
अमेरिका पर दोहरे मानदंड का आरोप
ईरान लंबे समय से अमेरिका पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाता रहा है। तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन खुद दुनिया भर में सैन्य कार्रवाई करता है, लेकिन जब कोई देश अपनी रक्षा करता है तो उसे “आतंकवाद” का नाम दे देता है।
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के इन आरोपों का उद्देश्य केवल प्रतिबंधों और सैन्य दबाव को सही ठहराना है।
तनाव और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के शीर्ष नेताओं पर इनाम की घोषणा से पहले से ही तनावपूर्ण हालात और भड़क सकते हैं। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इस तरह के कदम क्षेत्रीय शांति के बजाय टकराव को और गहरा कर सकते हैं।
तेहरान का कहना है कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी दबाव के आगे झुकेगा नहीं और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए अपनी रणनीति जारी रखेगा।




